Friday, 4 May 2018

Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार

Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी
भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार
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ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 11:47 PM IST



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वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 

जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।



वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 


जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।





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Chhattisgarh Government Recruiting Transgenders In Police Force Happy News - छत्तीसगढ़ पुलिस में अब होगी किन्नरों की भर्ती

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News - छत्तीसगढ़ पुलिस में अब होगी किन्नरों की भर्ती
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Know What World Bank Report Says On Electricity Program Of India - भारत के गांवों में बिजली को लेकर वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने किया ये दावा

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के गांवों में बिजली को लेकर वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने किया ये दावा
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Bill Gates Praises Digital India, Predict Incredible Future - बिल गेट्स ने की डिजिटल इंडिया की सराहना, 'अविश्वसनीय है भारत का भविष्य'

Bill Gates Praises Digital India, Predict Incredible Future - बिल गेट्स ने
की डिजिटल इंडिया की सराहना, 'अविश्वसनीय है भारत का भविष्य'
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प्रौद्योगिकी विकास के साथ साहसी फैसलों का उपयोग भारत के समावेशी विकास में सुधार और स्वास्थ्य व शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है। माइक्रोसाफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने ऐसा एक साक्षात्कार के दौरान कहा। सामाजिक व आर्थिक सुधारों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया की सराहना करते हुए गेट्स ने कहा कि डिजिटलीकरण निगरानी की गुणवत्ता और अंतत: शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए मददगार है। 

तकनीकी विकास भारत के विकास को तेजी देगा : बिल गेट्स

बिल गेट्स ने आगे यह कहा कि धारणा यह है कि अगर आप अपने आवाम के स्वास्थ्य और पोषण तथा शिक्षा प्रणाली का खयाल रखते हैं, तो भारत के उज्ज्वल भविष्य की इतनी अधिक संभावना है कि इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। जब बिल गेट्स से पूछा गया कि जैसे भारत के शीर्ष नेताओं का कहना था कि डिजिटलीकरण व आधुनिक प्रौद्योगिकी से भारत को आदर्श समाज के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी? तो उन्होंने बिल्कुल हां कहकर इसका उत्तर दिया। 

गेट्स बिल एंड मिलिंडा फाउंडेशन के प्रमुख के तौर पर दुनिया भर में समाज सेवा का काम कर रहें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अगले 20-25 सालों में जीवन प्रत्याशा, मां की मौत के बिना शिशु का जन्म और कुपोषण जैसे मुद्दों पर बहुत तरक्की करेगा। सिर्फ यही नहीं, यह लैंगिक असंतुलन को दूर करने में भी मदद करेगा। गेट्स ने भारत की जनसंख्या प्रोफाइल को देखते हुए भारत को एक युवा देश कहा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों की भी तारीफ की।



प्रौद्योगिकी विकास के साथ साहसी फैसलों का उपयोग भारत के समावेशी विकास में सुधार और स्वास्थ्य व शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है। माइक्रोसाफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने ऐसा एक साक्षात्कार के दौरान कहा। सामाजिक व आर्थिक सुधारों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया की सराहना करते हुए गेट्स ने कहा कि डिजिटलीकरण निगरानी की गुणवत्ता और अंतत: शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए मददगार है। 


तकनीकी विकास भारत के विकास को तेजी देगा : बिल गेट्स

बिल गेट्स ने आगे यह कहा कि धारणा यह है कि अगर आप अपने आवाम के स्वास्थ्य और पोषण तथा शिक्षा प्रणाली का खयाल रखते हैं, तो भारत के उज्ज्वल भविष्य की इतनी अधिक संभावना है कि इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। जब बिल गेट्स से पूछा गया कि जैसे भारत के शीर्ष नेताओं का कहना था कि डिजिटलीकरण व आधुनिक प्रौद्योगिकी से भारत को आदर्श समाज के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी? तो उन्होंने बिल्कुल हां कहकर इसका उत्तर दिया। 

गेट्स बिल एंड मिलिंडा फाउंडेशन के प्रमुख के तौर पर दुनिया भर में समाज सेवा का काम कर रहें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अगले 20-25 सालों में जीवन प्रत्याशा, मां की मौत के बिना शिशु का जन्म और कुपोषण जैसे मुद्दों पर बहुत तरक्की करेगा। सिर्फ यही नहीं, यह लैंगिक असंतुलन को दूर करने में भी मदद करेगा। गेट्स ने भारत की जनसंख्या प्रोफाइल को देखते हुए भारत को एक युवा देश कहा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों की भी तारीफ की।





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भारत में 85% घरों तक बिजली पहुंची, यहां अच्छा काम हुआ: वर्ल्ड बैंक; सरकार ने 80% का दावा किया था

भारत में 85% घरों तक बिजली पहुंची, यहां अच्छा काम हुआ: वर्ल्ड बैंक; सरकार ने 80% का
दावा किया था
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वाशिंगटन. वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिजली के लिए भारत में शानदार काम हो रहा है। देश की 85% आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है। खास बात ये है कि सरकार अभी 80% घरों में बिजली पहुंचने का दावा कर रही है, लेकिन वर्ल्ड बैंक ने इसे 5% ज्यादा बताया है। 2010 से 2016 के बीच भारत में हर साल 3 करोड़ लोगों को बिजली उपलब्ध करवाई गई जो कि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है।


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15 Luxury Hotels In India Included In The List Of World's Most Wanted Hotels - दुनिया के मोस्ट वांटेड होटलों की सूची में शामिल भारत के 15 लक्जरी होटल

15 Luxury Hotels In India Included In The List Of World's Most Wanted
Hotels - दुनिया के मोस्ट वांटेड होटलों की सूची में शामिल भारत के 15 लक्जरी होटल
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Updated Fri, 04 May 2018 03:14 PM IST


ग्राहकों की बढ़ती आकांक्षा को पूरा करने में अब भारतीय लक्जरी होटल भी दुनिया के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा में सफल होने लगे हैं। तभी तो होटल्स डॉट कॉम की वर्ष 2018 की रिपोर्ट में भारत के 15 लक्जरी होटल दुनिया के मोस्ट वांटेड होटलों की सूची में शामिल हो पाए हैं। इसमें दिल्ली के तीन, मुंबई और बंगलूरू के 4-4 होटल शामिल हैं। पिछले साल इस सूची में भारत के 8 होटल ही शामिल हो पाए थे। इसमें होटल्स डॉट कॉम द्वारा तैयार वर्ष 2018 की सूची में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तीन लक्जरी होटलों को स्थान मिला है, जिनमें दि लीला पैलेस, अंदाज-हयात और दि इंपीरियल शामिल हैं। 

होटल्स डॉट कॉम के मोस्ट वांटेड लिस्ट 2018 में दिल्ली के 3 जबकि मुंबई और बंगलूरू के 4-4 होटल शामिल

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के चार होटलों को इस सूची में स्थान मिला है, जिनमें ताजमहल पैलेस, ताज-सांताक्रुज, द ओबराय और जेडब्ल्यू मेरिएट-सहार शामिल हैं। इसमें देश की आईटी राजधानी बंगलूरू के भी चार होटलों को स्थान मिला है। वहां के द ओबराय, सेंट मार्क्स होटल, शांग्री-ला होटल और ताज बंगलूरू इस सूची में शामिल हैं। इसमें चेन्नई के द लीला पैलेस, पुणे के जेडब्ल्यू मैरिएट, कोलकाता के द ओबराय ग्रेंड और गुरूग्राम (एनसीआर) के द ओबराय को भी स्थान मिला है।  

 




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Neemrana Dialogue: No Change In India Position That Terror And Talks Cannot Go Together - भारत की पाक को दो टूक, आतंकवाद और बातचीत साथ साथ नहीं चल सकते

Neemrana Dialogue: No Change In India Position That Terror And Talks
Cannot Go Together - भारत की पाक को दो टूक, आतंकवाद और बातचीत साथ साथ नहीं
चल सकते
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 09:57 AM IST



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भारत सरकार का कहना है कि उसने पाकिस्तान के साथ अनौपचारिक बातचीत नीमराना शुरू कर दी है। यह दोनों देशों के बीच एक सामान्य प्रक्रिया है। जहां एक तरफ विदेश मंत्रालय इस बात पर चुप्पी साधे हुए है कि इस बातचीत को सरकार की तरफ से मंजूरी मिली थी या नहीं वहीं मंत्रालय का कहना है कि वह पहले की स्थिति पर कायम है कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते।

इस बातचीत को नीमराना डायलॉग नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि साल 1991-92 में राजस्थान के नीमराना किले में भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बैठक हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि दोनों तरफ से व्यावहारिक आदान-प्रदान सामान्य प्रक्रिया के तौर पर जारी है। यह दो नागरिक समाज के बीच एक बैठक थी जोकि पीपुल टू पीपुल बातची का का हिस्सा है। इसमें कुछ नया नहीं है। 

नीमराना डायलॉग की नए सिरे से शुरुआत करने के लिए हाल ही में भारत से एक दल इस्लामाबाद गया था। भारत की तरफ से जहां इस दल का प्रतिनिधित्व पूर्व विदेश सचिव और पाकिस्तान विशेषज्ञ विवेक काटजू और पूर्व एनसीईआरटी प्रमुख जेएस राजपूत ने किया था। वहीं पाकिस्तान की तरफ से पूर्व मंत्री जावेद जब्बर सहित दूसरे लोग मौजूद थे। यह बातचीत 28 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच हुई थी। 

जब कुमार से पूछा गया कि क्या इस डायलॉग को मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है तो उन्होंने इसका सीधा जवाब ना देते हुए बस इतना कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रति भारत का रवैया साफ है जिसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हमारी स्थिति अब भी वही है कि वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।



भारत सरकार का कहना है कि उसने पाकिस्तान के साथ अनौपचारिक बातचीत नीमराना शुरू कर दी है। यह दोनों देशों के बीच एक सामान्य प्रक्रिया है। जहां एक तरफ विदेश मंत्रालय इस बात पर चुप्पी साधे हुए है कि इस बातचीत को सरकार की तरफ से मंजूरी मिली थी या नहीं वहीं मंत्रालय का कहना है कि वह पहले की स्थिति पर कायम है कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते।


इस बातचीत को नीमराना डायलॉग नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि साल 1991-92 में राजस्थान के नीमराना किले में भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बैठक हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि दोनों तरफ से व्यावहारिक आदान-प्रदान सामान्य प्रक्रिया के तौर पर जारी है। यह दो नागरिक समाज के बीच एक बैठक थी जोकि पीपुल टू पीपुल बातची का का हिस्सा है। इसमें कुछ नया नहीं है। 

नीमराना डायलॉग की नए सिरे से शुरुआत करने के लिए हाल ही में भारत से एक दल इस्लामाबाद गया था। भारत की तरफ से जहां इस दल का प्रतिनिधित्व पूर्व विदेश सचिव और पाकिस्तान विशेषज्ञ विवेक काटजू और पूर्व एनसीईआरटी प्रमुख जेएस राजपूत ने किया था। वहीं पाकिस्तान की तरफ से पूर्व मंत्री जावेद जब्बर सहित दूसरे लोग मौजूद थे। यह बातचीत 28 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच हुई थी। 

जब कुमार से पूछा गया कि क्या इस डायलॉग को मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है तो उन्होंने इसका सीधा जवाब ना देते हुए बस इतना कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रति भारत का रवैया साफ है जिसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हमारी स्थिति अब भी वही है कि वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।





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Thursday, 3 May 2018

How much freedom in Indian media from different kinds of pressures । ZEE जानकारीः भारत का मीडिया, तरह-तरह के दबावों से कितना आज़ाद है ?

How much freedom in Indian media from different kinds of pressures ।
ZEE जानकारीः भारत का मीडिया, तरह-तरह के दबावों से कितना आज़ाद है ?
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आज World Press Freedom Day है. और हमने इस मौके पर समाज और मीडिया के रिश्तों पर एक छोटा सा विश्लेषण किया है . इससे आपको ये समझने में मदद मिलेगी कि भारत का मीडिया, तरह-तरह के दबावों से कितना आज़ाद है ? और भारत का समाज मीडिया के झूठ से कितना आज़ाद है ? एक अंतरराष्ट्रीय संस्था Reporters Without Borders के मुताबिक प्रेस की आज़ादी  के मामले में दुनिया के 180 देशों में भारत की Rank 138 है. ये रैंक पिछले साल के मुकाबले दो स्थान गिर गई है. 2017 में इसी संस्था ने भारत को 136वें और 2016 में 133वें स्थान पर रखा था.


Reporters Without Borders ने भारत को इस Index में उन देशों के साथ रखा है जहां पत्रकारों के लिए स्थितियां बहुत मुश्किल हैं. क्योंकि भारत के ठीक नीचे 139वें नंबर पर पाकिस्तान है . जहां फ़ौज के खिलाफ लिखने पर पत्रकारों को गायब कर दिया जाता है. 2018 के World Press Freedom Index में Norway, Sweden, Netherlands, Finland, और Switzerland, Top 5 देश हैं.  कुल 180 देशों की लिस्ट में नॉर्थ कोरिया सबसे नीचे हैं. जबकि चीन 176 वें नंबर पर है, क्योंकि वहां लोकतंत्र नहीं है और मीडिया पूरी तरह सरकारी है. ऐसे में ज़ाहिर है कि चीन में मीडिया को किसी तरह की आज़ादी नहीं है.


लेकिन भारत में मीडिया तमाम तरह के दबावों से आज़ाद है. पिछले 70 वर्षों में इमरजेंसी के दौर को छोड़ दिया जाए तो भारत में मीडिया को हमेशा अपनी बात कहने और तथ्यों के आधार पर किसी की भी आलोचना करने की पूरी आज़ादी रही है. भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है और मीडिया अपने इस Status का खूब फायदा उठाता है. भारतीय मीडिया, कई बार इस आज़ादी को असीमित मान लेता है. और इस आज़ादी से जुड़ी ज़िम्मेदारियों को कभी नहीं उठाता. जबकि सच ये है कि हर आज़ादी अपने साथ ज़िम्मेदारियां लेकर आती है और कोई भी आज़ादी असीमित नहीं हो सकती. 


आज ये समझने की ज़रूरत भी है कि आखिर भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता क्यों गिर रही है. मीडिया की आज़ादी और मीडिया का झूठ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. मीडिया की आज़ादी की बात तो हर कोई कर रहा है, लेकिन दूसरे पहलू के बारे में कोई आपको नहीं बताता. आज के मीडिया में सच की कवरेज अब बहुत मुश्किल हो गई है.इसके लिए हम आपको एक छोटा सा उदाहरण देना चाहते हैं. कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में आपने देखा होगा कि कैसे कश्मीर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट को आधार बनाकर एजेंडा चलाया गया.  


जब ये चार्जशीट मीडिया के सामने आई तो एक तरफा रिपोर्टिंग की गई. सोशल मीडिया के ज़रिए पीड़ित बच्ची की तस्वीर को वायरल किया गया, उसका नाम सबको बता दिया गया ताकि इसके आधार पर धार्मिक एजेंडा चलाया जा सके. कुछ मोमबत्तियां जलाकर मार्च निकाला जा सके, हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर हेडलाइन बनाई जा सकें.


लेकिन जब ज़ी न्यूज़ ने पूरे देश के सामने वो सबूत रखे, जो इस चार्जशीट पर सवाल उठाते थे, तो पूरा मीडिया मौन हो गया. पिछले 3 दिन से हम आपको ये बता रहे थे कि कश्मीर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक जिस दौरान आरोपी विशाल जंगोत्रा के कठुआ में होने की बात लिखी गई है, उस समय वो मुज़फ्फरनगर के मीरापुर में मौजूद था. इस खुलासे के बाद बिना तथ्यों वाला एजेंडा चलाने वाले लोग ख़ामोश हो गये. और मीडिया के एक बड़े हिस्से ने चुप्पी साध ली. ये चुप्पी वो ढाल है जिसकी आड़ में मीडिया का एक हिस्सा छुपने की कोशिश कर रहा है. ये मीडिया की सेलेक्टिव रिपोर्टिंग का सिर्फ एक उदाहरण है.


अगर आप हर रोज़ की ख़बरों को ध्यान से पढ़ेंगे और देखेंगे तो आपको बहुत आसानी से समझ में आ जाएगा कि मीडिया किस तरह, बिना किसी तथ्य या पढ़ाई लिखाई किए ख़बरें पेश करता है और जब ज़िम्मेदारी की बात आती है, तो कितनी आसानी से अपना पल्ला झाड़ लेता है. सोशल मीडिया पर अगर कोई झूठ फैला दे, तो भी हमारे देश का मीडिया उसे हाथों-हाथ लेता है और बिना तथ्यों की जांच किए, उसे लोगों के सामने रख देता है. धीरे धीरे हमारा मीडिया, सोशल मीडिया वाले एजेंडे का गुलाम बनता जा रहा है. और ये कोई शुभ संकेत नहीं है. ये मीडिया का दूसरा स्वरूप है. और यही वजह है कि भारत में मीडिया की साख लगातार गिर रही है.


अगर भारत का मीडिया लोगों का Brain Wash करने और एजेंडा चलाने के बजाय, उन्हें जागरूक बनाएगा, उन्हें सही जानकारियां देगा और सही तथ्य बताएगा तो उसे अपनी खोई हुई साख वापस मिल सकती है. जिस दिन जनता के मन में मीडिया की रैंक सुधर जाएगी उसी दिन World Press Freedom Index में भी भारत की स्थिति में सुधार आ जाएगा. 




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कश्मीर में मानवाधिकार हनन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए चिंता का विषय, भारत ने कहा- पाक एजेंडे से भटका रहा

कश्मीर में मानवाधिकार हनन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए चिंता का विषय, भारत ने
कहा- पाक एजेंडे से भटका रहा
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संयुक्त राष्ट्र. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया। पाकिस्तान के राजनयिक मसूद अनवर ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए चिंता का विषय है। उधर, भारत ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सूचना समिति को भटकाने की कोशिश कर रहा है।बता दें कि पिछले साल यूएन में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने एक जख्मी लड़की की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया था कि उसकी ये हालत कश्मीर में पैलेट गन से हमले के कारण हुई है। हालांकि बाद में तस्वीर गाजा हमले में घायल एक लड़की की निकली।


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