Friday, 4 May 2018

Allahabad High Court Challenges Its Own Decision In The Supreme Court - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Allahabad High Court Challenges Its Own Decision In The Supreme Court -
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
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हाईकोर्ट के पारिवारिक अदालतों की देखरेख के सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट अपने ही फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उसकी अपील पर जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की पीठ ने प्रतिवादी और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा एसोसिएशन को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट की ओर से जगजीत सिंह छाबड़ा और यशवर्धन मामले की पैरवी कर रहे हैं।
 
इस मामले में मुख्य मुद्दा उत्तर प्रदेश में पारिवारिक अदालतों की देखरेख की जिम्मेदारी हाईकोर्ट को दिए जाने के विरोधाभाषी नियमों को लेकर है। राज्य सरकार द्वारा पास उत्तर प्रदेश पारिवारिक अदालत नियम, 1995 के नियम 36 कहता है कि सभी पारिवारिक अदालतें हाईकोर्ट की देखरेख में काम करेंगी। 

हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा पास उत्तर प्रदेश पारिवारिक अदालत नियम, 2006 के नियम 58 के अनुसार पारिवारिक अदालत के जज जिला जज की प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक देखरेख के तहत आएंगे। अलबत्ता, इन पर हाईकोर्ट का पूर्ण नियंत्रण होगा।

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा एसोसिएशन ने नियम 58 को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने इसके 1995 की नियमावली के नियम 26 के विरोधाभाषी होने और संविधान के अनुच्छेद 235 का उल्लंघन करने की दलील दी थी। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए मामले को हाईकोर्ट की प्रशासनिक इकाई के पास भेजने का निर्देश दिया था। ताकि नियम 58 के लिए उपयुक्त संशोधन किया जा सके और पारिवारिक अदालतों को प्रभावी तरीके से हाईकोर्ट की देखरेख में लाया जा सके। इसी फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

याचिकाकर्ता की दलील -
1- हाईकोर्ट का उत्प्रेषण आज्ञापत्र जारी करना और उसी अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पेश करने को कहना न्यायिक अधिकारों के दायरे से आगे जाना है। हाईकोर्ट सिर्फ निचली अदालतों के खिलाफ ही उतप्रेषण आज्ञापत्र जारी कर सकता है, न कि अपने खिलाफ। ऐसा करके हाईकोर्ट ने अपने अधिकारक्षेत्र को लांघा है और यह फैसला कानूनन सही नहीं है। 
2- पारिवारिक अदालत अधिनियम, 1984 के अनुसार, पारिवारिक अदालत के कामकाज के लिए नियम बनाने का अधिकार भले ही राज्य सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट को हो लेकिन नियुक्तियों आदि के मामले में अंतिम फैसला हाईकोर्ट का ही होता है। ऐसा न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए किया गया है।
3- उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह संभव नहीं है कि जिला जज के पद वाले उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी को पारिवारिक अदालत का मुख्य जज बनाया जाए। 



हाईकोर्ट के पारिवारिक अदालतों की देखरेख के सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट अपने ही फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उसकी अपील पर जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की पीठ ने प्रतिवादी और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा एसोसिएशन को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट की ओर से जगजीत सिंह छाबड़ा और यशवर्धन मामले की पैरवी कर रहे हैं।


 
इस मामले में मुख्य मुद्दा उत्तर प्रदेश में पारिवारिक अदालतों की देखरेख की जिम्मेदारी हाईकोर्ट को दिए जाने के विरोधाभाषी नियमों को लेकर है। राज्य सरकार द्वारा पास उत्तर प्रदेश पारिवारिक अदालत नियम, 1995 के नियम 36 कहता है कि सभी पारिवारिक अदालतें हाईकोर्ट की देखरेख में काम करेंगी। 

हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा पास उत्तर प्रदेश पारिवारिक अदालत नियम, 2006 के नियम 58 के अनुसार पारिवारिक अदालत के जज जिला जज की प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक देखरेख के तहत आएंगे। अलबत्ता, इन पर हाईकोर्ट का पूर्ण नियंत्रण होगा।

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा एसोसिएशन ने नियम 58 को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने इसके 1995 की नियमावली के नियम 26 के विरोधाभाषी होने और संविधान के अनुच्छेद 235 का उल्लंघन करने की दलील दी थी। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए मामले को हाईकोर्ट की प्रशासनिक इकाई के पास भेजने का निर्देश दिया था। ताकि नियम 58 के लिए उपयुक्त संशोधन किया जा सके और पारिवारिक अदालतों को प्रभावी तरीके से हाईकोर्ट की देखरेख में लाया जा सके। इसी फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

याचिकाकर्ता की दलील -
1- हाईकोर्ट का उत्प्रेषण आज्ञापत्र जारी करना और उसी अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पेश करने को कहना न्यायिक अधिकारों के दायरे से आगे जाना है। हाईकोर्ट सिर्फ निचली अदालतों के खिलाफ ही उतप्रेषण आज्ञापत्र जारी कर सकता है, न कि अपने खिलाफ। ऐसा करके हाईकोर्ट ने अपने अधिकारक्षेत्र को लांघा है और यह फैसला कानूनन सही नहीं है। 
2- पारिवारिक अदालत अधिनियम, 1984 के अनुसार, पारिवारिक अदालत के कामकाज के लिए नियम बनाने का अधिकार भले ही राज्य सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट को हो लेकिन नियुक्तियों आदि के मामले में अंतिम फैसला हाईकोर्ट का ही होता है। ऐसा न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए किया गया है।
3- उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह संभव नहीं है कि जिला जज के पद वाले उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी को पारिवारिक अदालत का मुख्य जज बनाया जाए। 





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उ.कोरिया ने घड़ियां आधा घंटा आगे कीं, शांति के लिए किम ने द.कोरिया से मिलाया अपने देश का वक्त

उ.कोरिया ने घड़ियां आधा घंटा आगे कीं, शांति के लिए किम ने द.कोरिया से मिलाया अपने
देश का वक्त
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उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने शांति के प्रयासों को दिशा देने के लिए आखिरकार अपने देश की घड़ियों को शुक्रवार रात से आधा घंटा आगे कर लिया। अब उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का समय (टाइम जोन) एक जैसा हो गया है। 27 अप्रैल को किम और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन पहली बार एक-दूसरे के हाथों में हाथ लेकर बातचीत की। दोनों नेता बॉर्डर पर बने डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) में करीब 28 सेकंड तक हैंडशैक करते रहे। इसके साथ दोनों देशों के बीच चली आ रही 65 साल की दूरियां खत्म हो गई थीं।


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Thursday, 3 May 2018

Twitter Suggests All Users To Change Their Passwords - Twitter ने अपने 336 मिलियन यूजर्स से कहा फटाफट चेंज करें अपना पासवर्ड

Twitter Suggests All Users To Change Their Passwords - Twitter ने अपने
336 मिलियन यूजर्स से कहा फटाफट चेंज करें अपना पासवर्ड
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Twitter ने अपने 336 मिलियन यूजर्स को फटाफट पासवर्ड चेंज करने को कहा है। कंपनी ने इसकी जानकारी खुद गुरुवार को एक ट्वीट के जरिए दी। कंपनी ने अपने ट्वीट में कहा कि हाल में ही कंपनी को एक बग का पता चला है जिसकी वजह से सभी यूजर्स के पासवर्ड टेक्स्ट फॉर्म में सेव हो गए हैं।
 



वहीं Twitter के CEO जैक डॉर्सी ने भी ट्वीट करके पासवर्ड चेंज करने को कहा है। इसके अलावा ट्विटर के मोबाइल ऐप या डेस्कटॉप साइट पर विजिट करने पर भी पॉप अप विंडो के रूप में पासवर्ड चेंज करने का नोटिफिकेशन आ रहा है।

 



 



Twitter ने अपने 336 मिलियन यूजर्स को फटाफट पासवर्ड चेंज करने को कहा है। कंपनी ने इसकी जानकारी खुद गुरुवार को एक ट्वीट के जरिए दी। कंपनी ने अपने ट्वीट में कहा कि हाल में ही कंपनी को एक बग का पता चला है जिसकी वजह से सभी यूजर्स के पासवर्ड टेक्स्ट फॉर्म में सेव हो गए हैं।



 


ट्विटर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर पराग अग्रवाल ने भी इसकी जानकारी अपने ब्लॉग पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने लिखा, ‘ ट्विटर ने इस बग को फिक्स कर दिया है और अभी तक किसी भी यूजर्स के पासवर्ड के चोरी होने या अकाउंट के हैक होने की रिपोर्ट नहीं है। हालांकि बावजूद इसके सभी यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने अकाउंट का पासवर्ड चेंज कर लें। ’
 

दरअसल Twitter पासवर्ड को सुरक्षित रखने के लिए hashing प्रोसेस का इस्तेमला करता है। इस प्रोसेस में यूजर्स को पासवर्ड को यादृच्छिक अंकों और अक्षरों में बदल दिया जाता है, लेकिन इस बग के आने के कारण सभी पासवर्ड टेक्स्ट फॉर्मेट में दिखनेेे लगे थे।
 



वहीं Twitter के CEO जैक डॉर्सी ने भी ट्वीट करके पासवर्ड चेंज करने को कहा है। इसके अलावा ट्विटर के मोबाइल ऐप या डेस्कटॉप साइट पर विजिट करने पर भी पॉप अप विंडो के रूप में पासवर्ड चेंज करने का नोटिफिकेशन आ रहा है।

 



 





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केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से SC/ST एक्ट संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का किया आग्रह

केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से SC/ST एक्ट संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का किया आग्रह
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट को लेकर दिए निर्णय पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार गुरुवार को कोर्ट से अनुरोध किया. इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इन समुदायों के अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रति अत्याचार करने के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने का सौ फीसदी हिमायती है. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इस मामले में न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया. 


उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ऐसे नियम या दिशानिर्देश नहीं बना सकती जो विधायिका द्वारा पारित कानून के विपरीत हों. वेणुगोपाल ने अनुसूचित जाति - जनजाति कानून से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को वृहद पीठ को सौंपने का अनुरोध करते हुये कहा कि इस व्यवस्था की वजह से जानमाल का नुकसान हुआ है. 


यह भी पढ़ेंः SC/ST कानून पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रहा है केंद्र


पीठ ने अपने 20 मार्च के फैसले को न्यायोचित ठहराते हुये कहा कि अनुसूचित जाति - जनजाति कानून पर अपनी व्यवस्था के बारे में निर्णय करते समय शीर्ष अदालत ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं और फैसलों पर विचार किया था. 


पीठ ने कहा कि वह सौ फीसदी इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने और उनपर अत्याचार के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने के पक्ष में है. केन्द्र ने अनुसूचित जाति - जनजाति ( अत्याचारों की रोकथाम ) कानून , 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दो अप्रैल को न्यायालय में याचिका दायर की थी. 


शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने का निश्चय किया था परंतु उसने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मामले में और किसी याचिका पर विचार नहीं करेगी. यही नहीं , न्यायालय ने केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर फैसला होने तक 20 मार्च के अपने निर्णय को स्थगित रखने से इंकार कर दिया था. इस फैसले के बाद अनुसूचित जाति और जनजातियों के अनेक संगठनों ने देश में दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था जिसमें आठ व्यक्तियों की जान चली गयी थी. 


(इनपुट भाषा से)




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140 में से 11 कलाकारों को ही अपने हाथों फिल्म पुरस्कार देंगे राष्ट्रपति, 60 ने दी बहिष्कार की धमकी

140 में से 11 कलाकारों को ही अपने हाथों फिल्म पुरस्कार देंगे राष्ट्रपति, 60 ने दी
बहिष्कार की धमकी
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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चुने गए 140 कलाकारों में से सिर्फ 11 को ही इस बार राष्ट्रपति अपने हाथों सम्मानित करेंगे। बाकी लोगों को पुरस्कार सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। अभी तक सभी कलाकारों को राष्ट्रपति के हाथों की सम्मानित करने की परंपरा रही है। ऐसे में पुरस्कार पाने वाले 60 से ज्यादा कलाकारों ने यहां के विज्ञान भवन में गुरुवार को होने वाले इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की धमकी दी है।


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Wednesday, 2 May 2018

'अपने बेटे को खून से सना देख, सीरिया के बच्चों का दर्द महसूस किया'

'अपने बेटे को खून से सना देख, सीरिया के बच्चों का दर्द महसूस किया'
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श्रीनगर: अब भी खून के धब्बे उसके यूनीफॉर्म पर लगे हुए हैं, श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के न्यूरोसर्जरी वॉर्ड में  रिहान गोरसाय रह-रहकर अपनी आंखें खोलता है. और जब भी उसकी आंखें खुलती हैं, वह भयानक दर्द की शिकायत करता है. रिहान गोरसाय जो कि शोपियां के रेनबो इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र है, बुधवार (2 मई) की सुबह को उस वक्त जख्मी हुआ जब प्रदर्शनकारियों ने बंद के दौरान उसके स्कूल बस पर पत्थरबाजी की. एक पत्थर उसके सिर में लगा, जिससे उसके ललाट के आगे के हिस्से में फ्रैक्चर आ गया.


रिहान के पिता नुरूद्दीन गोरसाय जो कि एक स्कूल टीचर हैं और केलेर शोपियां में पोस्टेड हैं, ने अपने बेटे को अस्पताल के बेड पर देखते हुए कहा कि उन्हें स्कूल से फोन आया और तुरंत अस्पताल पहुंचने के लिए कहा गया. 'उनकी तरफ देखो, वह अब भी अपने स्कूली पोशाक में है... जब मैं कभी म्यांमार और सीरिया के बच्चों की तस्वीरें देखता था, तो घुटन महसूस करता था. आज, मैं यकीनी तौर पर उस दर्द को अनुभव कर सकता हूं. मैंने अपने बेटे को खून से सना हुआ देखा. यह मानवीय कृत्य नहीं है. हमें हमारे बच्चों को इन सब चीजों से दूर रखने की जरूरत है. इस बात की आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों की हिफाजत करें.' 


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जैसे ही बस पर हमला हुआ, इसके ड्राइवर ने बस को तेजी से स्कूल की ओर भगाया. गोरसाय ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, 'रिहान के प्रिंसिपल खुद अपनी गाड़ी उसे अस्पताल ले गए. वे मुझे भी साथ अस्पताल लेकर गए.' अस्पताल में, नुरूद्दीन गोरसाय को शोपियां के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की ओर फोन आया. गोरसाय ने बताया, 'एसपी साहिब ने मुझे अभी कॉल किया था. उन्होंने मुझे कहा कि वे उनलोगों जल्द गिरफ्तार कर लेंगे जो इस घटना के पीछे हैं. मैंने उनसे कहा कि मैंने उन्हें (पत्थरबाज प्रदर्शनकारियों को) माफ कर दिया है. मैं या फिर आप यह कैसे जान सकते हैं कि वे कौन लोग थे? आप किसी को पकड़ोगे और उसके घटना के लिए दोषी ठहरा दोगे.' 


पत्थरबाजों ने स्कूल बस को बनाया था निशाना
जम्मू - कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित शोपियां जिले में बुधवार (2 मई) को सुबह पत्थरबाजों ने एक स्कूल बस को निशाना बनाया जिससे दूसरी कक्षा के एक छात्र के सिर में चोटें आयी. इस घटना पर प्रदेश की मुख्यमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.


बस में 35 छात्र सवार थे
पुलिस ने बताया कि पत्थरबाजों ने जावूरा इलाके में एक निजी स्कूल की बस पर पथराव किया. इस घटना में दूसरी कक्षा का एक छात्र घायल हो गया. घायल छात्र रिहान गोरसाय को एसकेआईएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की हालत स्थिर है. बस में 35 छात्र सवार थे.


मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की तीखी प्रतिक्रिया
इस हमले पर प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि इस विवेकहीन और कायराना कृत्य के षडयंत्रकारियों को जल्द ही न्याय की जद में लाया जाएगा.


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उमर अब्दुल्ला ने जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्कूल बस पर हमले की निंदा की. उमर ने ट्वीट किया, ‘‘स्कूली बच्चों या पर्यटकों की बसों पर पथराव से इन पत्थरबाजों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में कैसे मदद मिलती है? इन हमलों की एकजुट होकर निंदा की जानी चाहिए और मेरा यह ट्वीट इसका हिस्सा है.’’


DGP ने की हमले की निंदा
पुलिस महानिदेशक एस पी वैद ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह पागलपन है कि पत्थरबाजों द्वारा स्कूली बच्चों को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि इन अपराधियों को कानून का सामना करना पड़ेगा. नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद मट्टू ने भी घटना की निंदा की और अलगाववादियों पर निशाना साधा.




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'हमें लगा था जिंदा नहीं बचेंगे, हमने अपने बच्चों को अलविदा कह दिया था'

'हमें लगा था जिंदा नहीं बचेंगे, हमने अपने बच्चों को अलविदा कह दिया था'
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अमेरिका के पूर्व नौसेना अधिकारी रॉबर्ट ओ नील ने कहा है कि अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद परिसर में छापा मारने वाले कमांडो ने पहले यह मान लिया था कि वे इस छापे के दौरान मारे जाएंगे. 





'हमें लगा था जिंदा नहीं बचेंगे, हमने अपने बच्चों को अलविदा कह दिया था'

पूर्व नौसेना अधिकारी रॉबर्ट ओ नील का दावा है कि उनकी गोली से ओसामा बिन लादेन की मौत हुई थी.(फाइल फोटो)


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