Friday, 4 May 2018

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव: मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव:
मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश
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कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।

फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।


बीजेपी की कोशिश कांग्रेस के अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदूइदावरू यानी ओबीसी और दलित) के गढ़ में सेंध लगाने की है। उन्हें उम्मीद है कि उसके दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक का एक हिस्सा जद (स) को जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं पिछड़ी कुरुबा जाति से हैं। प्रधानमंत्री मोदी उसके ओबीसी कार्ड का मजबूत काट हैं।

दक्षिण का मायाजाल

बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि दक्षिण कर्नाटक की फिलहाल जद (स) बनाम कांग्रेस लड़ाई को यदि वे त्रिकोणीय बना सकें तो चुनावी नतीजे अलग ही आएंगे। यहां 10 से 12 सीटें जीतने के लिए बीजेपी को मोदी का ही सहारा है।

लिंगायत कार्ड

पार्टी का मानना है कि कांग्रेस अंतिम अस्त्र के तौर पर बीजेपी की केंद्र सरकार पर लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने वाले राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी न देने का आरोप लगाएगी। लेकिन बीजेपी के भरोसा है कि इससे उन्हें अधिक नुकसान नहीं होगा।
 



कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।


फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।






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ओबीसी बनाम ओबीसी







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कर्नाटक विधानसभा चुनाव : 'मुधोल' में भाजपा को मिल रही कड़ी चुनौती

कर्नाटक विधानसभा चुनाव : 'मुधोल' में भाजपा को मिल रही कड़ी चुनौती
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नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव की जंग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस की विचारधाराओं के साथ दिग्गजों की जंग के रूप में भी देखी जा रही है.  दोनों पार्टियां जहां हर सीट पर जीत हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं तो वहीं कुछ सीटें ऐसी हैं जहां नेताओं का रुतबा उनकी जीत की गारंटी तय करता दिखाई देता है. भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी.एस. येदियुरप्पा के बाद राज्य इकाई के दूसरे दिग्गज नेता गोविंद करजोल मुधोल विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं. कर्नाटक विधानसभा क्षेत्र संख्या-19 यानी मुधोल निर्वाचन क्षेत्र दुनिया भर में शिकारी कुत्ते की मूल नस्ल के लिए जाना जाता है.


1900 के दशक में इंग्लैंड की यात्रा करने वाले मुधोल के महाराजा किंग जॉर्ज पांचवें को शिकारी कुत्तों का एक जोड़ा भेंट किया था, जो मुधोल नस्ल को लोकप्रिय बनाता था. मुधोल में शिव का एक बहुत पुराना भूमिगत मंदिर है. साथ ही मुधोर यहां पाए जाने वाले बारीक पत्थरों के लिए भी प्रसिद्ध है. मुधोल तालुक में बहुत अधिक संख्या में हैंडलूम हैं, जहां हस्तनिर्मित साड़ी बनाई जाती हैं.


मुधोल कई चीनी कारखानों के लिए भी पूरे राज्य में प्रसिद्ध है
इन साड़ियों की देश भर में अच्छी मांग भी हैं. इसके अलावा मुधोल कई चीनी कारखानों के लिए भी पूरे राज्य में प्रसिद्ध है. बात करें क्षेत्रीय राजनीति की तो मुधोल निर्वाचन क्षेत्र 1978 से लेकर 2008 से अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के लिए आरक्षित था.  हालांकि 2013 में इसे एक सामान्य श्रेणी निर्वाचन क्षेत्र में बदल दिया गया था. उत्तरी कर्नाटक के बागलकोट जिले में स्थित मुधोल निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव की शुरुआत 1957 के बाद से कभी भी भाजपा का नेता दूसरे नंबर पर नहीं रहा. हालांकि 1999 इसका अकेला अपवाद रहा है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार रामप्पा बालाप्पा ने गोविंद करजोल को शिकस्त दी थी. 


गोविंद करजोल मुधोल निर्वाचन क्षेत्र के सबसे अनुभवी उम्मीदवार
भाजपा कर्नाटक इकाई के उपाध्यक्ष गोविंद करजोल मुधोल निर्वाचन क्षेत्र के सबसे अनुभवी उम्मीदवार हैं.  1994 में जनता दल के टिकट पर कांग्रेस के उम्मीदवार रामप्पा बालाप्पा के खिलाफ चुनाव लड़कर जीतने वाले गोविंद ने इस क्षेत्र पर कब्जा जमाया था.  हालांकि 1999 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बालाप्पा के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था, लेकिन 2004, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर गोविंद ने इस सीट को भाजपा की सुरक्षित सीटों में शुमार कर दिया. प्रदेश उपाध्यक्ष गोविंद विधानसभा चुनाव 2018 में एक बार फिर से मैदान में हैं. 


नए नेता सतीश को टिकट दिए जाने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया
वहीं लगातार पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के हाथ के साथ मैदान में उतरने वाले रामप्पा बालाप्पा से पार्टी ने किनारा कर सतीश चिन्नपा बंदीवद्दार को टिकट दिया है. नए नेता सतीश को टिकट दिए जाने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया था और पांच बार गोविंद के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले रामप्पा बालाप्पा को फिर से टिकट देने की मांग की थी. वहीं राज्य में सत्ता की राह तलाश रही जनता दल (सेक्युलर) ने शंकर नाईक को चुनाव मैदान में उतारा है. शंकर ने 2003 में अखिल भारतीय प्रगतिशील जनता दल (एआईपीजेडी) का दामन छोड़कर जेडी (एस) का हाथ थामा था. 


इसके साथ ही शिवसेना के अरविंद कांबली, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के भीमराव कालवगोल, प्रबुद्ध रिपब्लिकन पार्टी के रमेश गोन्यागोल, कर्नाटक राज्य रोयता संघ के बस्वंत लक्ष्मण कांबली और एक निर्दलीय चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन पहले ही जनता दल (सेक्युलर) को अपना समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 12 मई को मतदान होगा और मतों की गणना 15 मई को होगी. 


इनपुट एजेंसी से भी  




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Cm Yogi Adityanath Says Siddaramaiah Is Very Perfect In Lying - कर्नाटक चुनाव: सीएम योगी बोले- झूठ बोलने में बहुत परफेक्ट हैं सिद्धरमैया

Cm Yogi Adityanath Says Siddaramaiah Is Very Perfect In Lying - कर्नाटक
चुनाव: सीएम योगी बोले- झूठ बोलने में बहुत परफेक्ट हैं सिद्धरमैया
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया झूठ बोलने में बहुत परफेक्ट हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भाजपा की बड़ी जीत होने वाली है जबकि यहां कांग्रेस बुरी तरह हारने वाली है, क्योंकि कांग्रेस विभाजनकारी और भ्रष्टाचार की राजनीति करती है। 

इस दौरान उन्होंने गुरुवार को आए आंधी-तूफान पर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आए तेज तूफान और बारिश के कारण जो बाधा आई है उसपर वह खुद नजर बनाए हुए हैं। पूरे प्रदेश में राहत कार्य जारी है। जिस पर उनकी नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वह कल से राज्य के दौरे पर निकलेंगे और तूफान से हुए नुकसान का जायजा लेंगे।

इससे पहले कर्नाटक में भाजपा के लिए वोट मांग रहे यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जनता से कहा कि वह कांग्रेस को खारिज कर दे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिहादी मानसिकता वाली पार्टी है और वह बांटने की राजनीति करती है। एक जनसभा में आदित्यनाथ ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर ‘सबसे भ्रष्ट सरकार’ चलाने का आरोप लगाया। योगी ने कहा, ‘मैं यहां आपसे अपील करने आया हूं कि आप कांग्रेस की विभाजनकारी, आतंकवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दें।’ 
सिद्धारमैया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ‘जिहादियों’ ने राज्य में पिछले पांच वर्षों में भाजपा के 23 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी और यह इस बात का प्रमाण है। आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की तुलना करते हुए कहा कि उनके प्रदेश में कोई जिहादी तत्व अपना सिर नहीं उठा सकता।

सिद्धारमैया कर्नाटक को एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए मैं यहां यह बताने आया हूं कि कर्नाटक मुक्त कांग्रेस इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। उत्तर प्रदेश के आंधी से प्रभावित होने के बावजूद कर्नाटक में योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार करने की कांग्रेस ने आलोचना की है। मालूम हो कि धूल भरी आंधी से प्रदेश में कई लोगों की मौत हो गई है। 

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट के जरिये प्रदेश के मुख्यमंत्री की इस बात के लिए खिंचाई की है कि वह प्रभावितों को छोड़कर कर्नाटक में प्रचार कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने इतिहास का ज्ञान दुरुस्त करना चाहिए। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को कर्नाटक में एक चुनावी रैली में कांग्रेस पर सेना और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अपमान करने का आरोप लगाया था।


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया झूठ बोलने में बहुत परफेक्ट हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भाजपा की बड़ी जीत होने वाली है जबकि यहां कांग्रेस बुरी तरह हारने वाली है, क्योंकि कांग्रेस विभाजनकारी और भ्रष्टाचार की राजनीति करती है। 


इस दौरान उन्होंने गुरुवार को आए आंधी-तूफान पर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आए तेज तूफान और बारिश के कारण जो बाधा आई है उसपर वह खुद नजर बनाए हुए हैं। पूरे प्रदेश में राहत कार्य जारी है। जिस पर उनकी नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वह कल से राज्य के दौरे पर निकलेंगे और तूफान से हुए नुकसान का जायजा लेंगे।

इससे पहले कर्नाटक में भाजपा के लिए वोट मांग रहे यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जनता से कहा कि वह कांग्रेस को खारिज कर दे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिहादी मानसिकता वाली पार्टी है और वह बांटने की राजनीति करती है। एक जनसभा में आदित्यनाथ ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर ‘सबसे भ्रष्ट सरकार’ चलाने का आरोप लगाया। योगी ने कहा, ‘मैं यहां आपसे अपील करने आया हूं कि आप कांग्रेस की विभाजनकारी, आतंकवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दें।’ 





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जिहादियों ने राज्य में पिछले 5 वर्षों में BJP के 23 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी







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Thursday, 3 May 2018

पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला कार्यकर्ताओं को दिया कर्नाटक चुनाव जीतने का 'गुरुमंत्र'

पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला कार्यकर्ताओं को दिया कर्नाटक चुनाव जीतने का 'गुरुमंत्र'
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नमो ऐप के जरिए कर्नाटक में बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं से संवाद किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि समाज में लिंगानुपात बेहतर होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि महिलाएं मान जाएं तो पूरा परिवार उस बात को मान लेता है. पीएम ने भरोसा दिलाया कि हमारा देश महिला विकास और महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ रही है, जिसमें बीजेपी को भी भरोसा है. हम महिला नेतृत्व में विकास की बात करते हैं.


पीएम ने बीजेपी की महिल कार्यकर्ताओं से कहा कि वोटरों तक सही बात पहुंचाने की ताकत उन्हीं में है. चुनाव जितने के लिए महिला कार्यकर्ताओं को बूथ लेवल तक सरकार के कार्यों को पहुंचाना होगा. महिला कार्यकर्ता वोटर्स को आसानी से अपनी बात समझा सकती हैं. उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं से कहा कि वे बूथ जीतने पर फोकस करें, चुनाव अपने आप जीत जाएंगे.


उन्होंने कहा कि संगठन हो या सरकार हम महिलाओं को प्राथमिकता देते हैं. पीएम ने केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि दुनिया भर के नेताओं के बीच हमारी ये दो महिला नेता देश को मजबूती से पेश करती हैं.



पीएम ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को सफल बनाने की अपील की. साथ ही समाज के लोगों से पूछा कि क्या वे कभी बेटों से पूछते हैं कहां जा रहे हो, कहां गए थे? उन्होंने अपील की कि अगर लड़कों से ऐसे सवाल किए जाने लगेंगे तो महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के मामलों में काफी कमी आएगी.


इससे पहले गुरुवार को पीएम मोदी ने चुनावी भाषण में कहा कि कर्नाटक सरकार भ्रष्टाचार में ‘गोल्ड मेडलिस्ट’ है और कांग्रेस नेता ‘सत्ता के नशे में चूर’ है. मोदी ने इस राज्य में आगामी चुनाव से कुछ दिन पहले भाजपा की रैलियों को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं. राष्ट्रवाद का मुद्दा उठाते हुए मोदी ने राष्ट्रीय नायकों तथा सेना का ‘‘ अपमान ’’ करने पर कांग्रेस की निंदा की. 


उन्होंने त्रिशंकु विधानसभा के चुनावी विश्लेषकों के पूर्वानुमान को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा अपने दम पर सरकर बनाएगी क्योंकि जनता ने ‘कांग्रेस के अंतिम किले को ढहाने का’ मन बना लिया है. 


जेडीएस को बीजेपी की ‘बी टीम’ कहकर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा का अपमान करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की निंदा करने के कुछ दिन बाद मोदी ने जनता से देवगौड़ा की पार्टी को अपना वोट देकर इसे ‘व्यर्थ’ नहीं करने का अनुरोध किया और कहा कि यह पार्टी चुनावों में तीसरे स्थान पर रहेगी.


सिद्धरमैया सरकार को बताया ‘सीधा रुपैया सरकार’
खनन घोटाले में कथित रूप से संलिप्त विवादित रेड्डी बंधुओं को भाजपा द्वारा टिकट देने को लेकर विपक्ष के हमले का सामना कर रहे मोदी ने कर्नाटक सरकार पर पलटवार करते हुए उस पर आरोप लगाया कि वह खनन नीति तैयार नहीं करके अवैध खनन को रोकने के केन्द्र के प्रयास को नाकाम कर रही है. 


सिद्धरमैया सरकार को ‘सीधा रुपैया सरकार’ बताते हुए मोदी ने बेल्लारी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक आम आदमी अधिकारियों को रिश्वत दिये बिना अपना कोई काम नहीं करा सकता. 




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Amit Shah Will Start Election Preparations In Madhya Pradesh - मध्यप्रदेश में चुनावी तैयारियों का श्रीगणेश करेंगे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

Amit Shah Will Start Election Preparations In Madhya Pradesh - मध्यप्रदेश
में चुनावी तैयारियों का श्रीगणेश करेंगे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह
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डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 09:06 AM IST



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बीजेपी का एक कोर-ग्रुप मध्य प्रदेश में चुनावी तैयारियों का श्रीगणेश करने के लिए 4 मई को भोपाल पहुंचने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में यह कोर ग्रुप चुनावी मंथन शिविर में हिस्सा लेगा। कर्नाटक चुनावों से थोड़ा वक्त निकाल कर अमित शाह इस दौरान तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ उठ रही विरोध की लहर को शांत करने के लिए बीजेपी का कोर ग्रुप भोपाल जाने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह कोर ग्रुप चार दिनों तक राज्य में जल्दी चुनावों की रणनीति तय करने का खाका तैयार करेगा। साथ ही, कोर ग्रुप उन चुनौतियों का भी आंकलन करेगा, जिनका पार्टी पिछले कुछ समय से सामना कर रही है। साथ ही कमजोर मोर्चों पर रणनीति बनाने पर भी चर्चा भी करेंगे। 

बीजेपी अध्यक्ष इस विशेष मंथन शिविर से निकले सुझावों की समीक्षा भी करेंगे और उपचुनावों में मिली हार के कारणों पर भी मंथन करेंगे। इसके अलावा शाह बीजेपी के तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक करेंगे। बैठक में करीब 3000 कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के करीब 58 जिलाध्यक्ष और 800 से ज्यादा मंडल अध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक कोर ग्रुप के साथ इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री, नवनिर्वाचित राज्य प्रभारी राकेश सिंह, पार्टी इन-चार्ज विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व राज्य प्रभारी और राज्य सभा सांसद प्रभात झा के भी शामिल होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस ने भी राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। राज्य के दो क्षत्रपों दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बावजूद वरिष्ठ नेता कमल नाथ को राज्य प्रभारी बनाया गया है। इन बदलावों से बीजेपी में यह संदेश गया है कि कांग्रेस पार्टी में पूरी एकजुटता है और पूरी तरह से वह चुनावी रणनीति बनाने में जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को कहीं न कहीं अंदेशा है कि 15 साल पुराने शासन के खिलाफ विरोध के स्वर उठ सकते हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए राज्य के कोने-कोने का दौरा कर रहे हैं।

4 दिनों तक होने वाली इस कोर ग्रुप की मीटिंग में बीजेपी नेता वरिष्ठ आरएसएस सहयोगियों के साथ भी आगामी चुनावी रणनीति पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। पार्टी की कोशिश है कि चुनावों की अधिसूचना जारी होने से पहले ही राज्य में चुनावी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। गौरतलब है कि इस साल के आखिर तक बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं।



बीजेपी का एक कोर-ग्रुप मध्य प्रदेश में चुनावी तैयारियों का श्रीगणेश करने के लिए 4 मई को भोपाल पहुंचने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में यह कोर ग्रुप चुनावी मंथन शिविर में हिस्सा लेगा। कर्नाटक चुनावों से थोड़ा वक्त निकाल कर अमित शाह इस दौरान तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे।


मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ उठ रही विरोध की लहर को शांत करने के लिए बीजेपी का कोर ग्रुप भोपाल जाने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह कोर ग्रुप चार दिनों तक राज्य में जल्दी चुनावों की रणनीति तय करने का खाका तैयार करेगा। साथ ही, कोर ग्रुप उन चुनौतियों का भी आंकलन करेगा, जिनका पार्टी पिछले कुछ समय से सामना कर रही है। साथ ही कमजोर मोर्चों पर रणनीति बनाने पर भी चर्चा भी करेंगे। 

बीजेपी अध्यक्ष इस विशेष मंथन शिविर से निकले सुझावों की समीक्षा भी करेंगे और उपचुनावों में मिली हार के कारणों पर भी मंथन करेंगे। इसके अलावा शाह बीजेपी के तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक करेंगे। बैठक में करीब 3000 कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के करीब 58 जिलाध्यक्ष और 800 से ज्यादा मंडल अध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक कोर ग्रुप के साथ इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री, नवनिर्वाचित राज्य प्रभारी राकेश सिंह, पार्टी इन-चार्ज विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व राज्य प्रभारी और राज्य सभा सांसद प्रभात झा के भी शामिल होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस ने भी राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। राज्य के दो क्षत्रपों दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बावजूद वरिष्ठ नेता कमल नाथ को राज्य प्रभारी बनाया गया है। इन बदलावों से बीजेपी में यह संदेश गया है कि कांग्रेस पार्टी में पूरी एकजुटता है और पूरी तरह से वह चुनावी रणनीति बनाने में जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को कहीं न कहीं अंदेशा है कि 15 साल पुराने शासन के खिलाफ विरोध के स्वर उठ सकते हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए राज्य के कोने-कोने का दौरा कर रहे हैं।

4 दिनों तक होने वाली इस कोर ग्रुप की मीटिंग में बीजेपी नेता वरिष्ठ आरएसएस सहयोगियों के साथ भी आगामी चुनावी रणनीति पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। पार्टी की कोशिश है कि चुनावों की अधिसूचना जारी होने से पहले ही राज्य में चुनावी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। गौरतलब है कि इस साल के आखिर तक बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं।





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कर्नाटक चुनाव : क्या येदियुरप्पा के किले 'शिकारीपुरा' में सेंध लगा पाएगी कांग्रेस?

कर्नाटक चुनाव : क्या येदियुरप्पा के किले 'शिकारीपुरा' में सेंध लगा पाएगी कांग्रेस?
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नई दिल्ली : कर्नाटक विधानसभा चुनाव की जंग धीरे-धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है. यह चुनाव जहां देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के लिए अपने विजय रथ को आगे बढ़ाने और 'कांग्रेस मुक्त भारत' के उसके नारे को सही साबित करने का मौका देगा तो वहीं देश में अपने सिमटते अस्तित्व को बचाने में जुटी कांग्रेस के लिए कर्नाटक का रण उसके लिए संजीवनी का काम कर सकता है. विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए जहां अपनी सीटों को बचाने का दबाव है वहीं बीजेपी को अपने गढ़ में सेंध लगने की आशंका. बीजेपी की राज्य इकाई के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक बीएस येदियुरप्पा अपने मजबूत किले शिकारीपुरा से चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं. 


कर्नाटक विधानसभा सीट संख्या 115 शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र. शिकारीपुरा ऐतिहासिक स्थानों और प्राकृतिक आकर्षण स्थानों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रसिद्ध अंजनेय मंदिर शामिल हैं. यहां देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं. शिकारीपुरा विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 2,13,590 हैं जिसमें से 1,08,344 पुरुष और 1,05,246 महिलाएं हैं. 


शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र में ज्यादातर कुरुबा, गुडिगर्स, लिंगायत, लैम्बानी, हैवीक, मुस्लिम, ईसाई और अन्य जातियां रहती हैं. क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से इस सीट को पारंपरिक रूप से बीजेपी का गढ़ कहा जाता है. इस सीट पर पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी.एस. येदियुरप्पा का एकछत्र राज रहा है. 


येदियुरप्पा ने 1983 में इस सीट से पहली बार चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने 1985 उप-चुनाव, विधानसभा चुनाव 1989, 1994, 2004, 2008 और 2013 में जीत हासिल कर इस निर्वाचन क्षेत्र को विपक्षी दलों के लिए अभेद्य किले में स्थापित कर दिया. हालांकि 1999 में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार महालींग्प्पा के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था लेकिन उसके बाद से उन्होंने कभी इस सीट पर हार नहीं मिला.


शिकारीपुरा विधानसभा क्षेत्र में 2014 में हुए उपचुनाव में येदियुरप्पा की जगह उनके बेटे बी.वाई राघवेंद्र ने चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के अपने प्रतिद्वंद्वी एच.एस. शांथवीरप्पा गौड़ा को मात दी थी. विधानसभा चुनाव 2018 में शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी ने एक बार फिर येदियुरप्पा को मैदान में उतारा है. 


1965 में सामाजिक कल्याण विभाग में प्रथम श्रेणी क्लर्क के रूप में नियुक्त येदियुरप्पा नौकरी छोड़कर और शिकारीपुरा चले गए जहां उन्होंने वीरभद्र शास्त्री की शंकर चावल मिल में एक क्लर्क के रूप में कार्य किया. अपने कॉलेज के दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े येदियुरप्पा ने 1970 में सार्वजनिक सेवा शुरू की. उन्हें संघ की शिकारीपुर इकाई के कार्यवाहक (सचिव) नियुक्त किया गया था. इसके बाद वह 1972 में शिकारीपुरा टाउन नगर पालिका के लिए चुने गए और उन्हें जनसंघ की तालुक इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 


येदियुरप्पा 1975 में शिकारीपुरा के टाउन नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद 1980 में उन्हें बीजेपी की शिकारीपुरा तालुक इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 1988 में येदियुरप्पा को कर्नाटक की बीजेपी इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया. येदियुरप्पा ने 12 नवंबर 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. हालांकि, जेडी (एस) ने मंत्रालयों पर असहमति जताते हुए सरकार को समर्थन करने से इंकार कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 19 नवंबर 2007 को उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में इस्तीफा देना पड़ा. 


येदियुरप्पा को दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए भी जाना जाता है उन्होंने दक्षिण भारत में बीजेपी के लिए प्रवेश द्वार बनाया. उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2008 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और येदियुरप्पा ने 30 मई 2008 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. हालांकि 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. 


येदियुरप्पा को 2011 में उस वक्त तब तगड़ा झटका लगा जब उनके खिलाफ पांच मामले दर्ज किए गए, येदियुरप्पा पर जमीन के अवैध अधिसूचना और भ्रष्टाचार के आरोप लगे, हालांकि उच्च न्यायालय ने उन्हें क्लीन चिट देकर उन्हें और पार्टी को राहत दे दी. येदियुरप्पा को 2016 में फिर से प्रदेशाध्यक्ष चुना गया. 


येदियुरप्पा और बीजेपी की पारंपरिक सीट व सुरक्षित गढ़ होने के कारण विपक्षियों के लिए इस किले में सेंध लगाना मुश्किल सा दिखाई पड़ता है. पिछले नौ चुनावों में बीजेपी ने सिर्फ एक बार ही यह सीट हारी है. इसी रिकॉर्ड को देखते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस ने येदियुरप्पा के खिलाफ स्थानीय नगर पालिका सदस्य गोनी मालतेश को मैदान में उतारा है. 


वहीं जेडी (एस) ने बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ लो-प्रोफाइल नेता एच.टी. बालीगर को चुनाव मैदान में उतारा है. इसके अलावा आम आदर्मी पार्टी ने चंद्रकांत एस. रेवांकर और चार निर्दलीय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन पहले ही जनता दल (सेक्युलर) को अपना समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 12 मई को मतदान होगा और मतों की गणना 15 मई को होगी.




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