Saturday, 5 May 2018

परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी
सहित कई नेताओं से वार्ता
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ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी.





परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

भारत दौरे पर पहुंचे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से नई दिल्ली में एक मुलाकात के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)







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Thursday, 3 May 2018

बिल गेट्स ने AADHAR की तारीख, बोले-गोपनीयता को लेकर कोई समस्या नहीं

बिल गेट्स ने AADHAR की तारीख, बोले-गोपनीयता को लेकर कोई समस्या नहीं
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भारत में एक अरब से अधिक लोगों ने आधार के लिये अपना पंजीकरण कराया है. यह दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक आईडी प्रणाली है.





बिल गेट्स ने AADHAR की तारीख, बोले-गोपनीयता को लेकर कोई समस्या नहीं

62 साल के अरबपति उद्यमी और परमार्थ कार्य में लगे गेट्स ने कहा कि इन्फोसिस के संस्थापक नंदन निलेकणि इस परियोजना पर विश्वबैंक को परामर्श और मदद कर रहे हैं (फाइल फोटोः रॉयटर्स)







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US Secretary of State Mike Pompeo । 'उत्तर कोरिया से खराब समझौते का मतलब नहीं, अमेरिका नहीं दोहराएगा कोई गलती'

US Secretary of State Mike Pompeo । 'उत्तर कोरिया से खराब समझौते का मतलब
नहीं, अमेरिका नहीं दोहराएगा कोई गलती'
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वॉशिंगटन: अमेरिका के नवनिर्वाचित विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार (2 मई) को चेताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के साथ खराब समझौता कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने वादा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पूर्व में की गई गलतियां नहीं दोहराएगा. पोम्पियो ने कहा कि हमने हमारे समक्ष पेश चुनौतियों के बारे में सच बोलकर और उनका सामना कर बेहतरीन काम किया है, लेकिन मजबूत देशों के साथ साझेदारी करना अमेरिका और विश्व को अधिक समृद्ध और सुरक्षित बनाएगा. उन्होंने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु निरस्त्रीकरण बनाने के लक्ष्यों को हासिल करने के अमेरिकी प्रयास अभी शुरुआती चरण में ही है और अभी यह सप्ष्ट नहीं है कि ये प्रयास फलदायक ही होंगे.


उत्तर कोरिया में 3 अमेरिकी हिरासत में लिए गए
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (3 मई) को संकेत दिया कि उत्तर कोरिया में तीन अमेरिकियों के हिरासत में लिये जाने की सूचना मिली है. इससे पहले सूत्रों ने अमेरिकियों को एक स्थान से दूसरी जगह ले जाये जाने की जानकारी दी थी. यह खबर ऐसे समय में आई है जब ट्रंप उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मिलने की तैयारी कर रहे हैं. ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘पिछला प्रशासन लंबे समय से उत्तरी कोरियाई श्रम शिविर से तीन बंधकों की रिहाई की मांग कर रहा था.’’


रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका, उत्तर कोरिया से किम हाक सोंग, किम सांग - डूक और किम डोंग - चूल की रिहाई की मांग कर रहा है और दोनों पक्ष उनकी रिहाई से संबंधित समझौता करने के करीब हैं. दक्षिण कोरिया कार्यकर्ता चोई सूंग - रयोंग ने ‘एएफपी’ से कहा था, ‘‘वे उत्तर कोरिया की बाहरी सीमा पर एक होटल में रह रहे हैं.’’


उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण स्थल पूरी तरह क्रियाशील : रिपोर्ट
उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण स्थल इस समय पूरी तरह क्रियाशील है. उत्तर कोरिया ने हालांकि पिछले महीने घोषणा की थी कि वह परीक्षण स्थल को बंद करने जा रहा है. एक खास वेबसाइट पर यह खबर मंगलवार (1 मई) को आई. समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने पुंग्ये-री परमाणु परीक्षण स्थल को अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों व पत्रकारों की मौजूदगी में स्थायी रूप से बंद करने का प्रस्ताव दिया था. 


यह प्रस्ताव उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन व दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन के बीच 27 अप्रैल को हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों कोरिया द्वारा प्रायद्वीप को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्त किए जाने पर हुई सहमति के बाद दिया गया था. परमाणु परीक्षण स्थल के बारे में नए रडार डाटा के विश्लेषण के बाद वेबसाइट 38 नॉर्थ पर खबर आई कि दक्षिण व पश्चिम प्रवेशद्वार से दो पहाड़ी इलाके में अभी भी पहुंच बनी हुई है और यह भविष्य के भूमिगत परमाणु परीक्षण में सहयोग कर सकते हैं.


रिपोर्ट में यह भी पुष्टि की गई है कि परमाणु परीक्षण स्थल की दो मध्य सुरंगें अच्छी हालत में हैं. इसके विपरीत विशेषज्ञों की पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तर कोरिया द्वारा सितंबर में किए गए छठे व सबसे ज्यादा शक्तिशाली भूमिगत परमाणु परीक्षण में दोनों सुरंगें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाएंगी.




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Wednesday, 2 May 2018

जस्टिस जोसेफ मामले में सरकार की सफाई, नाम वापसी का उत्तराखंड फैसले से कोई संबंध नहीं

जस्टिस जोसेफ मामले में सरकार की सफाई, नाम वापसी का उत्तराखंड फैसले से कोई संबंध नहीं
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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति की सिफारिश थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की इस सिफारिश को ठुकरा दिया था. इस पर सरकार ने सफाई दी है कि सिफारिश ठुकराने के पीछे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मामला कतई नहीं है. सरकार ने बुधवार को इस बात को खारिज कर दिया कि उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की सुप्रीम में नियुक्ति के प्रस्ताव को उसने इसलिए ठुकरा दिया कि उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था.


कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों से सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकती है. प्रसाद ने कहा कि वह पूरे अधिकार के साथ इस बात से इनकार करते हैं कि इसका उससे कोई लेना-देना है. उन्होंने कहा कि अपने रूख का समर्थन करने के लिए उनके पास दो स्पष्ट कारण हैं.


यह भी पढ़ें- जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति पर फैसला टला, कॉलेजियम की बैठक रही बेनतीजा


कानून मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में तीनचौथाई बहुमत के साथ सरकार चुनी गई है. दूसरा, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने उस आदेश (न्यायमूर्ति जोसेफ) की पुष्टि की थी. न्यायमूर्ति खेहर ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को भी खारिज कर दिया था. इसके बाद भी वह राजग सरकार के कार्यकाल में प्रधान न्यायाधीश बने. 
प्रसाद ने न्यायपालिका के संबंध में पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया और कहा वह सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे. 


सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति जोसेफ की नियुक्ति को रोकने के फैसले के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में प्रसाद ने कहा कि सरकार के खिलाफ प्रायोजित आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आमतौर पर और विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा सरकार के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन संबंधी उनके फैसले को लेकर उनकी नियुक्ति को रोका गया.


बता दें कि सरकार ने 26 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम से कहा था कि वह न्यायमूर्ति जोसेफ के संबंध में अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करे. 




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