Friday, 4 May 2018

ZEE जानकारीः ड्राइविंग करते वक्त किया मोबाइल का इस्तेमाल तो कैंसिल होगा लाइसेंस

ZEE जानकारीः ड्राइविंग करते वक्त किया मोबाइल का इस्तेमाल तो कैंसिल होगा लाइसेंस
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अगर भारत में गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को एक गंभीर अपराध मान लिया जाए तो देश के कम से कम 30 प्रतिशत लोग जेल के अंदर होंगे. आपने अक्सर लोगों को Driving के दौरान मोबाइल फोन पर बात करते हुए या Message करते हुए देखा होगा. हो सकता आप भी ऐसा करते हो . ऐसे लोगों को ये बात याद रखनी चाहिए कि गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से, दिमाग का Reaction time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी दिमाग एकदम सुस्त और लापरवाह हो जाता है. इसकी वजह से किसी की जान भी जा सकती है लेकिन ये बात हमारे देश के लोगों को अब तक समझ में नहीं आई है. ऐसे लोगों को समझाने के लिए कानून के डंडे की ज़रूरत पड़ती है .आपने देखा होगा कि जो काम हमारे देश में सिस्टम और सरकारें कई वर्षों में नहीं कर पातीं वो काम... कई बार अदालतें चुटकियों में कर देती हैं. इस बार ये काम राजस्थान हाइकोर्ट में हुआ है . 


राजस्थान हाइकोर्ट ने राजस्थान सरकार को ये आदेश दिया है कि गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस Cancel कर दिया जाए . ये एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे पूरे देश में लागू करने की ज़रूरत है . आपने देखा होगा कि कुछ बीमारियां दवाइयों से ठीक नहीं हो पाती. ऐसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है. गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए बड़े पैमाने पर सर्जरी की ज़रूरत है.


वर्ष 2016 में मोबाइल फोन पर बात करने की वजह से  4 हज़ार 976 सड़क हादसे हुए थे जिनमें 2 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गये थे. किसी भी हादसे के बाद अकसर ये कहा जाता है कि भगवान की मर्ज़ी के आगे किसी की नहीं चलती.. लेकिन ये भगवान की मर्ज़ी नहीं... लापरवाह लोगों की खुदगर्ज़ी है. लोगों की इस लापरवाह सोच को समझने के लिए देश के 8 बड़े शहरों में एक सर्वे किया गया. इसमें 47 प्रतिशत लोगों ने माना कि वो गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर बात करते हैं. 


34% लोगों ने कहा कि फोन पर बात करते हुए उन्हें कई बार अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और वो किसी तरह सड़क हादसे से बाल-बाल बच जाते हैं. एक survey के मुताबिक भारत के हर 10 में से 3 नागरिक ऐसे हैं, जो Driving करते वक्त Phone का इस्तेमाल करते हैं. हर 10 में से 3 भारतीय नागरिक, गाड़ी चलाते वक्त, या तो Phone से Message भेजते हैं, E-mail करते हैं या फिर Social Media को Access करते हैं. IIT Bombay की एक स्टडी के मुताबिक गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से दिमाग का Reaction time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी इस दौरान आपका दिमाग मोबाइल फोन में उलझ जाता है और ध्यान भटकने की वजह से गाड़ी चलाने में लापरवाही हो जाती है . 


अगर गाड़ी चलाते हुए आप मोबाइल फोन पर कोई Message Type करते हैं तो आपके दिमाग का Reaction Time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी सड़क पर आपका ध्यान और सतर्कता कई गुना कम हो जाते हैं. और जब आप फोन पर बात करते हैं तो आपके दिमाग का Reaction time 40 प्रतिशत कम हो जाता है. गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले को अक्सर ये लगता है कि वो सब कुछ देख रहा है. लेकिन ऐसा होता नहीं है. इस दौरान आपका दिमाग 50% से भी ज़्यादा देखी गई चीज़ों को नज़र अंदाज़ कर देता है.  


अक्सर चालान से बचने के लिए ज़्यादातर लोग Driving के दौरान hands free या Ear Phone का इस्तेमाल करते हैं.. और किसी तरह पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं. ये चालाकी आपको चालान से तो बचा सकती है लेकिन हादसे से नहीं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक स्कूल बस की ट्रेन से टक्कर हो गई थी. और उस स्कूल बस का ड्राइवर भी कान में Earphone लगाकर गाड़ी चला रहा था और उसे किसी की बात सुनाई नहीं दे रही थी. इस लापरवाही की वजह से 13 बच्चों की मौत हो गई थी. कुल मिलाकर इस रिसर्च का सार ये हैं कि गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ दीजिए वर्ना ये गलती आपकी और सड़क पर चलने वाले लोगों की जिंदगी ख़तरे में डाल सकती है .


हमारे देश के लोगों में नियम-कानून के प्रति सम्मान की भावना बहुत कम है. वो सड़कों पर अपनी मर्ज़ी के हिसाब से चलना चाहते हैं . सड़क पर ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई के दौरान अक्सर लोग ये कहते हैं कि तुम जानते नहीं मैं कौन हूं....मेरी पहचान ऊपर तक है . ऐसे लोगों को अगर नॉर्थ कोरिया के कानून बारे में पता चल जाए तो उनकी ये अकड़ कम हो सकती है . नॉर्थ कोरिया एक ऐसा देश है जहां सिर्फ़ तानाशाह किम जोंग उन.. का कानून चलता है... और वहां ज़रा सी लापरवाही पर सज़ा-ए-मौत दे दी जाती है. हालांकि पिछले कुछ समय से किम जोंग उन.. के व्यवहार में कुछ नरमी आई है . और वो दोस्ती की भाषा बोलने लगे हैं.




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Thursday, 3 May 2018

'अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो ईरान भी इसका हिस्सा नहीं रहेगा'

'अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो ईरान भी इसका हिस्सा नहीं रहेगा'
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तेहरान: ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटने का फैसला करता है, तो ईरान भी विश्व शक्तियों के साथ हुए इस समझौते का हिस्सा नहीं रहेगा. सरकारी टेलीविजन वेबसाइट ने ईरान के विदेश नीति सलाहकार अली अकबर विलायती के हवाले से बताया, ‘‘अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो हम भी इस समझौते में नहीं बने रहेंगे.’’ ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को ‘‘बेकार’’ बताते हुए इससे हटने की धमकी दी है. 12 मई को इस समझौते का नवीकरण होना है.


ब्रिटेन में ईरान के दूत ने परमाणु समझौता रद्द करने की चेतावनी दी
इससे पहले ब्रिटेन में ईरान के दूत ने कहा था कि अमेरिका के परमाणु समझौते से पीछे हटने की सूरत में ईरान भी इससे बाहर होने पर विचार कर सकता है. ब्रिटेन में ईरान के शीर्ष राजदूत हामिद बेदिनेजाद ने 3 मई को प्रसारित हुए एक साक्षात्कार में यह बात कही थी. हामिद ने कहा कि अगर अमेरिका 2015 में हुए इस समझौते से पीछे हटता है तो ईरान भी “अपनी पिछली स्थिति में लौटने के लिए तैयार है.” 


सीएनएन के साथ साक्षात्कार में ईरान के दूत ने कहा, “जब अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा तो इसका मतलब होगा कि कोई समझौता बचा ही नहीं.” उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक महत्त्वपूर्ण पक्ष ने संधि को निरस्त किया है और साफ तौर पर इसका उल्लंघन किया है.’’


ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे अमेरिका : संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं. इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था.


गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं." इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था.




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दलितों के हाथ का बना खाना खाएं और खुद बर्तन धोएं तो मानूंगी 'दलित प्रेम': BJP सांसद

दलितों के हाथ का बना खाना खाएं और खुद बर्तन धोएं तो मानूंगी 'दलित प्रेम': BJP सांसद
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लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आलाकमान की ओर से दलितों को पार्टी से जोड़ने का आदेश मिलने के बाद से नेताओं का इस समाज के लोगों के साथ खाना खाने का चलन शुरू हो चला है. दलितों के घर में जाकर नेताओं के खाना खाने के बढ़ते चलन पर बीजेपी की ही दलित सांसद ने नाराजगी जाहिर की है. बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने इसे दिखावा और बहुजन समाज का ‘अपमान‘ करार दिया है.


'संविधान ने दलितों को बराबरी का अधिकार दिया है'
वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की ओर से हाल में दलितों के घर में खाना खाये जाने के बारे में पूछे गये सवाल पर बहराइच लोकसभा सीट से सांसद सावित्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भारत के संविधान में जाति व्यवस्था को खत्म करते हुए सबको बराबर की जिंदगी जीने का अधिकार दिया है, लेकिन आज भी अनुसूचित जाति के प्रति लोगों की मानसिकता साफ नहीं है.


'दिखावे के लिए दलितों के घर खाया जा रहा खाना'
उन्होंने टेलीफोन कहा ‘इसीलिये लोग उनके घर में खाना खाने तो जाते हैं, लेकिन उनका बनाया हुआ खाना नहीं खाते. उनके लिये बाहर से बर्तन आते हैं, बाहर से खाना बनाने वाले आते हैं, वे ही परोसते भी हैं. दिखावे के लिये दलित के दरवाजे पर खाना खाकर फोटो खिंचवायी जा रही है और उन्हें व्हाट्सअप, फेसबुक पर वायरल किये जाने के साथ-साथ टीवी चैनलों पर चलवाकर वाहवाही लूटी जा रही है. इससे पूरे देश के बहुजन समाज का अपमान हो रहा है.’’ पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा की ओर से एक दलित के घर में रात्रि भोज पर जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जहां आरोप लगे थे कि मंत्री अपनी तरफ से भोजन और पानी लेकर वहां पहुंचे थे.


सावित्री ने खुद बर्तन धोने की दी सलाह
सावित्री ने कहा कि बात तो तब हो जब दलित के हाथ का बनाया हुआ खाना खाएं और खुद उसके बर्तनों को धोएं. उन्होंने कहा कि अगर अनुसूचित जाति के लोगों का सम्मान बढ़ाना है तो उनके घर पर खाना खाने के बजाय उनके लिये रोटी, कपड़े, मकान और रोजगार का इंतजाम किया जाए. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह अनुसूचित जाति के लोगों के लिये नौकरियां सृजित करे. केवल खाना खाने से अनुसूचित जाति के लोग आपसे नहीं जुड़ेंगे.


पार्टी अध्यक्ष के सामने नहीं उठाएंगी यह मुद्दा
क्या वह इस मुद्दे को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के सामने रखेंगी, इस सवाल पर पार्टी सांसद ने कोई साफ जवाब नहीं दिया. सावित्री ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के लोगों को आज भी हीन भावना से देखा जाता है. मैं सांसद हूं और मुझे बीजेपी सांसद के बजाय दलित सांसद कहा जाता है. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दलित राष्ट्रपति कहा जाता है. क्या यह अनुसूचित जाति के लोगों का अपमान नहीं है. 


उन्होंने कहा कि इस नजरिये से आज भी संविधान को नहीं माना जा रहा है. अगर संविधान को उसकी मूल भावना से लागू कर दिया जाए तो देश में गैर बराबरी और जाति व्यवस्था खुद ब खुद ही खत्म हो जाएगी. आज आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ा जा रहा है और उसे खंडित करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है. घोड़ी चढ़ने पर दलित की हत्या की जा रही है.


बीजेपी के प्रति नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं सावित्री फूले
इससे पहले पिछले महीने सांसद सावित्री ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित काशीराम स्मृति उपवन में 'भारतीय संविधान व आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन' कर सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी.




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So This Is The Reason Of Terrible Storm - 75 की मौत: तो इस वजह से आया था भयानक तूफान, 2 दिन इन इलाकों में रहेगा असर

So This Is The Reason Of Terrible Storm - 75 की मौत: तो इस वजह से आया था
भयानक तूफान, 2 दिन इन इलाकों में रहेगा असर
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स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 

वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।


स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 


वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।




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'अगर अमेरिकी ने परमाणु समझौता तोड़ा, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा'

'अगर अमेरिकी ने परमाणु समझौता तोड़ा, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं
हटेगा'
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लंदन: ब्रिटेन में ईरान के दूत ने कहा है कि अमेरिका के परमाणु समझौते से पीछे हटने की सूरत में ईरान भी इससे बाहर होने पर विचार कर सकता है. ब्रिटेन में ईरान के शीर्ष राजदूत हामिद बेदिनेजाद ने गुरुवार (3 मई) को प्रसारित हुए एक साक्षात्कार में यह बात कही. हामिद ने कहा कि अगर अमेरिका 2015 में हुए इस समझौते से पीछे हटता है तो ईरान भी “अपनी पिछली स्थिति में लौटने के लिए तैयार है.”


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से बाहर निकलने की धमकी दी थी. सीएनएन के साथ साक्षात्कार में ईरान के दूत ने कहा, “जब अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा तो इसका मतलब होगा कि कोई समझौता बचा ही नहीं.” उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक महत्त्वपूर्ण पक्ष ने संधि को निरस्त किया है और साफ तौर पर इसका उल्लंघन किया है.’’


खबरों के मुताबिक ट्रंप ने इस समझौते को रद्द करने की बात कही है जो ईरान और छह अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच हुआ था. अमेरिका को 12 मई तक इस समझौते को अपना समर्थन नए सिरे से देना था, लेकिन ट्रंप ने इससे पहले ही समझौते से बाहर होने की बात कह दी थी.


ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे अमेरिका : संयुक्त राष्ट्र
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं. इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था.


अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं."




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