Thursday, 3 May 2018

दलितों के हाथ का बना खाना खाएं और खुद बर्तन धोएं तो मानूंगी 'दलित प्रेम': BJP सांसद

दलितों के हाथ का बना खाना खाएं और खुद बर्तन धोएं तो मानूंगी 'दलित प्रेम': BJP सांसद
[ad_1]

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आलाकमान की ओर से दलितों को पार्टी से जोड़ने का आदेश मिलने के बाद से नेताओं का इस समाज के लोगों के साथ खाना खाने का चलन शुरू हो चला है. दलितों के घर में जाकर नेताओं के खाना खाने के बढ़ते चलन पर बीजेपी की ही दलित सांसद ने नाराजगी जाहिर की है. बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने इसे दिखावा और बहुजन समाज का ‘अपमान‘ करार दिया है.


'संविधान ने दलितों को बराबरी का अधिकार दिया है'
वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की ओर से हाल में दलितों के घर में खाना खाये जाने के बारे में पूछे गये सवाल पर बहराइच लोकसभा सीट से सांसद सावित्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भारत के संविधान में जाति व्यवस्था को खत्म करते हुए सबको बराबर की जिंदगी जीने का अधिकार दिया है, लेकिन आज भी अनुसूचित जाति के प्रति लोगों की मानसिकता साफ नहीं है.


'दिखावे के लिए दलितों के घर खाया जा रहा खाना'
उन्होंने टेलीफोन कहा ‘इसीलिये लोग उनके घर में खाना खाने तो जाते हैं, लेकिन उनका बनाया हुआ खाना नहीं खाते. उनके लिये बाहर से बर्तन आते हैं, बाहर से खाना बनाने वाले आते हैं, वे ही परोसते भी हैं. दिखावे के लिये दलित के दरवाजे पर खाना खाकर फोटो खिंचवायी जा रही है और उन्हें व्हाट्सअप, फेसबुक पर वायरल किये जाने के साथ-साथ टीवी चैनलों पर चलवाकर वाहवाही लूटी जा रही है. इससे पूरे देश के बहुजन समाज का अपमान हो रहा है.’’ पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा की ओर से एक दलित के घर में रात्रि भोज पर जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जहां आरोप लगे थे कि मंत्री अपनी तरफ से भोजन और पानी लेकर वहां पहुंचे थे.


सावित्री ने खुद बर्तन धोने की दी सलाह
सावित्री ने कहा कि बात तो तब हो जब दलित के हाथ का बनाया हुआ खाना खाएं और खुद उसके बर्तनों को धोएं. उन्होंने कहा कि अगर अनुसूचित जाति के लोगों का सम्मान बढ़ाना है तो उनके घर पर खाना खाने के बजाय उनके लिये रोटी, कपड़े, मकान और रोजगार का इंतजाम किया जाए. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह अनुसूचित जाति के लोगों के लिये नौकरियां सृजित करे. केवल खाना खाने से अनुसूचित जाति के लोग आपसे नहीं जुड़ेंगे.


पार्टी अध्यक्ष के सामने नहीं उठाएंगी यह मुद्दा
क्या वह इस मुद्दे को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के सामने रखेंगी, इस सवाल पर पार्टी सांसद ने कोई साफ जवाब नहीं दिया. सावित्री ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के लोगों को आज भी हीन भावना से देखा जाता है. मैं सांसद हूं और मुझे बीजेपी सांसद के बजाय दलित सांसद कहा जाता है. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दलित राष्ट्रपति कहा जाता है. क्या यह अनुसूचित जाति के लोगों का अपमान नहीं है. 


उन्होंने कहा कि इस नजरिये से आज भी संविधान को नहीं माना जा रहा है. अगर संविधान को उसकी मूल भावना से लागू कर दिया जाए तो देश में गैर बराबरी और जाति व्यवस्था खुद ब खुद ही खत्म हो जाएगी. आज आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ा जा रहा है और उसे खंडित करने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है. घोड़ी चढ़ने पर दलित की हत्या की जा रही है.


बीजेपी के प्रति नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं सावित्री फूले
इससे पहले पिछले महीने सांसद सावित्री ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित काशीराम स्मृति उपवन में 'भारतीय संविधान व आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन' कर सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी.




[ad_2]

Source link

140 में से 11 कलाकारों को ही अपने हाथों फिल्म पुरस्कार देंगे राष्ट्रपति, 60 ने दी बहिष्कार की धमकी

140 में से 11 कलाकारों को ही अपने हाथों फिल्म पुरस्कार देंगे राष्ट्रपति, 60 ने दी
बहिष्कार की धमकी
[ad_1]

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चुने गए 140 कलाकारों में से सिर्फ 11 को ही इस बार राष्ट्रपति अपने हाथों सम्मानित करेंगे। बाकी लोगों को पुरस्कार सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। अभी तक सभी कलाकारों को राष्ट्रपति के हाथों की सम्मानित करने की परंपरा रही है। ऐसे में पुरस्कार पाने वाले 60 से ज्यादा कलाकारों ने यहां के विज्ञान भवन में गुरुवार को होने वाले इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की धमकी दी है।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

[ad_2]

Source link

पाकिस्‍तानी जनरल बाजवा क्‍या भारत की तरफ बढ़ा रहे दोस्‍ती का हाथ?

पाकिस्‍तानी जनरल बाजवा क्‍या भारत की तरफ बढ़ा रहे दोस्‍ती का हाथ?
[ad_1]

अदालती फैसले के चलते नवाज शरीफ के सत्‍ता से बाहर होने के बाद पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा अचानक भारत को लेकर दिए अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं. ऐसा इसलिए भी क्‍योंकि माना जाता रहा है कि नवाज शरीफ, भारत के साथ संबंध सुधारने के इच्‍छुक थे लेकिन अपनी सेना के कारण वह ऐसा नहीं कर सके. यह भी कहा जाता है कि भारत के साथ दोस्‍ती की चाह के कारण ही उनको सत्‍ता से बेदखल होना पड़ा. लेकिन अब स्‍थान की पूर्ति के लिए पाकिस्‍तान की सबसे ताकतवर शख्सियत के रूप में जनरल कमर जावेद बाजवा सामने आए हैं.


बाजवा सिद्धांत
जनरल बाजवा ने पिछले दिनों कहा कि भारत-पाक के बीच कश्‍मीर समेत सभी विवादों का हल विस्‍तृत रूप से सार्थक बातचीत से ही निकल सकता है. उन्‍होंने ये भी कहा है कि मोदी सरकार अपने सख्‍त रुख के कारण पाकिस्‍तान के साथ अभी बातचीत नहीं कर रही है लेकिन अपनी तेज गति से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था के कारण उसको अगले दो-तीन साल के भीतर पाकिस्‍तान के साथ बातचीत करने की दरकार होगी. इसके साथ ही यह भी उन्‍होंने हाल में कहा है कि पाकिस्‍तान को ऐसे शांतिप्रेमी देश के रूप में स्‍थापित करने का सपना देखते हैं जो दुनिया के साथ शांतिपूर्ण और सह-अस्तित्‍व की भावना के साथ रहना चाहता है. इन सारे बयानों को यदि एक साथ जोड़कर देखा जाए तो इसको पाकिस्‍तानी विदेश नीति के संदर्भ में बाजवा डॉक्ट्रिन(सिद्धांत) कहा जा रहा है. अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर जनरल बाजवा इस तरह के बयान क्‍यों दे रहे हैं?


बयान का मतलब
इसका जवाब लंदन के किंग्‍स कॉलेज में इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने दैनिक भास्‍कर में लिखे अपने लेख में देते हुए कहा है कि दरअसल जनरल बाजवा यह संकेत दे रहे हैं कि नवाज शरीफ के सीन से हटने के बाद अब पाकिस्‍तानी फौज का पूरी तरह से नियंत्रण है. यानी कि पाकिस्‍तान के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की बातचीत में सेना की भूमिका को नजरअंदाज करना असंभव है. हालांकि वह यह भी कहते हैं कि पाकिस्‍तान में इसी जुलाई-अगस्‍त में आम चुनाव होने वाले हैं और अगले एक साल के भीतर भारत में चुनाव होने वाले हैं. लिहाजा दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में जमी बर्फ फिलहाल पिघलने वाली नहीं है.


‘ट्रैक 2’ की कूटनीति प्रक्रिया बहाल
हालांकि पाकिस्तानी संगठनों द्वारा भारत में बड़ी संख्या में आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आए ठहराव के बीच भारतीय विशेषज्ञों के एक समूह ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करने और 'ट्रैक 2' की कूटनीति प्रक्रिया को बहाल करने के लिए पाकिस्तान का दौरा किया. कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक मूल ट्रैक 2 पहल ‘नीमराणा संवाद’ को इस दौरे के साथ नई शुरुआत मिली. भारतीय पक्ष की अगुवाई पूर्व विदेश सचिव विवेक काटजू एवं अन्य विशेषज्ञों ने की, जबकि पाकिस्तानी पक्ष में पूर्व मंत्री जावेद जब्बार एवं अन्य शामिल थे. सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच इस्लामाबाद में 28 से 30 अप्रैल के बीच संवाद हुआ.


एक सूत्र के मुताबिक, ''दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दे बातचीत के जरिये सुलझाये जाने चाहिए.'' सूत्रों ने बैठक में चर्चा के विषयों के बारे में और जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर तनाव तथा अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की.


सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष अपने प्रस्ताव विचार के लिए अपनी सरकारों को सौंपेंगे. पाकिस्तानी पक्ष में शामिल विशेषज्ञों में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पूर्व गवर्नर इशरत हुसैन भी थे जिनका नाम जुलाई में संभावित आम चुनाव के दौरान पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के उम्मीदवारों के तौर पर मीडिया में चल रहा है. ट्रैक 2 की वार्ता को पूरी तरह गुप्त रखा गया और आयोजकों ने इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी साझा नहीं किया. 1990 के दशक की शुरुआत में नीमराणा संवाद की शुरुआत हुई थी.


साल 2016 में पाकिस्तान के संगठनों द्वारा किये गये आतंकी हमलों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के लक्षित हमलों के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था. दोनों पक्ष अक्सर एक दूसरे पर नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाते हैं. हाल ही में भारत ने कहा था कि वह शंघाई सहयोग संगठन की रूपरेखा के तहत रूस में कई देशों के आतंकवाद निरोधक अभ्यास में पाकिस्तान के साथ भाग लेगा.




[ad_2]

Source link

Wednesday, 2 May 2018

Controversy Create After National Film Awards Are Not Given By The President - राष्ट्रपति के अलावा स्मृति के हाथों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर छिड़ा विवाद

Controversy Create After National Film Awards Are Not Given By The
President - राष्ट्रपति के अलावा स्मृति के हाथों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर
छिड़ा विवाद
[ad_1]



न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 May 2018 10:20 AM IST



ख़बर सुनें



राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्वारा कुछ अहम पुरस्कार ही दिए जाने की घोषणा से पुरस्कृत होने वाले कई लोग नाराज हो गए हैं। कई ने पुरस्कार न लेने की चेतावनी दी है।

राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी कार्यक्रम को सिर्फ एक घंटे का समय देते हैं। इस दौरान यदि वे सभी पुरस्कृत लोगों को खुद सम्मानित न कर पाए तो शेष पुरस्कार केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। 

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार अशोक मलिक का कहना है कि पद ग्रहण करने के बाद से वह प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। लेकिन जाने से पहले सभी पुरस्कृत लोगों के साथ एक ग्रुप फोटो जरूर खिंचवाएंगे। अभी तक राष्ट्रपति सभी राष्ट्रीय पुरस्कार स्वयं देते थे। इस बार भी आमंत्रण पत्र पर यही लिखा है कि इसी बात से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कुछ लोगों में आक्रोश है। 



राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्वारा कुछ अहम पुरस्कार ही दिए जाने की घोषणा से पुरस्कृत होने वाले कई लोग नाराज हो गए हैं। कई ने पुरस्कार न लेने की चेतावनी दी है।


राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी कार्यक्रम को सिर्फ एक घंटे का समय देते हैं। इस दौरान यदि वे सभी पुरस्कृत लोगों को खुद सम्मानित न कर पाए तो शेष पुरस्कार केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। 

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार अशोक मलिक का कहना है कि पद ग्रहण करने के बाद से वह प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। लेकिन जाने से पहले सभी पुरस्कृत लोगों के साथ एक ग्रुप फोटो जरूर खिंचवाएंगे। अभी तक राष्ट्रपति सभी राष्ट्रीय पुरस्कार स्वयं देते थे। इस बार भी आमंत्रण पत्र पर यही लिखा है कि इसी बात से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कुछ लोगों में आक्रोश है। 





[ad_2]

Source link

प्रधानमंत्री की तारीफ का मतलब गठबंधन नहीं, कर्नाटक चुनाव में भाजपा से हाथ नहीं मिलाएंगे: देवगौड़ा

प्रधानमंत्री की तारीफ का मतलब गठबंधन नहीं, कर्नाटक चुनाव में भाजपा से हाथ नहीं
मिलाएंगे: देवगौड़ा
[ad_1]

बेंगलुरु. जनता दल सेकुलर (जेडीएस) प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने बुधवार को कहा कि आगामी कर्नाटक चुनाव में भाजपा से गठबंधन की संभावना नहीं है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चुनावी रैली के दौरान देवगौड़ा की तारीफ की थी। इस पर मीडिया ने जेडीएस प्रमुख से गठबंधन की संभावनाओं पर सवाल पूछा। उन्होंने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री की तारीफ का मतलब गठबंधन नहीं है। बता दें, मोदी ने उडुपी में कहा था कि प्रधानमंत्री के तौर पर देवगौड़ा जी हमेशा ही सम्मान के हकदार हैं और मैंने उनका सम्मान किया।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

[ad_2]

Source link