Saturday, 26 May 2018

रिया चक्रवर्ती बायोग्राफी | Biography of Rhea Chakraborty

रिया चक्रवर्ती बायोग्राफी | Biography of Rhea Chakraborty
[ad_1]



रिया चक्रवर्ती  जिन्हें शायद आपने सबसे पहले MTV के शो को होस्ट करते देखा होगा आजकल अपनी एक्टिंग स्किल से दर्शकों को लुभा रही है| जी हाँ अपनी सबसे पहली Bollywood Debut Film “Mere Dad Ki Maruti” से चर्चा में आई रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) की फेन फोलोविंग आजकल बढती ही जा रही है| तो चलिए आज आपको बताते हैं रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) के बारे में….





Rhea Chakraborty Personal Details:-


Name – Rhea Chakraborty (रिया चक्रवर्ती)
Birth Date (जन्म दिनांक) – 1 july 1992
Address – Mumbai, Maharashtra (मुंबई, महाराष्ट्र)
Nationality – Indian


रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) का जन्म महाराष्ट्र के एक हिन्दू बंगाली परिवार में हुआ| बचपन से ही रिया चक्रवर्ती को एक्ट्रेस बनने का शोक चढ़ चूका था| अपने इसी शौक को अपना करिअर बनाने के लिए रिया ने रुख किया टेलीविज़न इंडस्ट्री की और| रिया ने 2009 में MTV के Show “TVS Scooty Teen Diva” के साथ अपने टेलीविज़न कैरिअर की शुरुआत की|


उनका MTV का सफ़र इतना लाज़वाब था की जल्द ही वह दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में कामियाब हो गई| इतना ही नहीं, रिया चक्रवर्ती ने जल्द ही MTV Delhi में MTV Vj के लिए ऑडिशन दिया| दर्शकों के दिलों में तो रिया पहले ही अपनी जगह बना चुकी थी और अब उनका सिलेक्शन MTV Vj के लिए भी हो चूका था| इसके बाद रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) ने MTV के लिए “Pepsi MTV Watsapp, Tic tac College Beat और MTV Gone in 60 Second” जैसे कई शो होस्ट किए|


साल 2012 रिया के लिए एक खास साल रहा| इसी साल रिया चक्रवर्ती ने तेलगु फिल्म इंडस्ट्री में अपना हाथ आजमाया और अपनी पहली डेब्यू फिल्म “Tuneega Tuneega” से तेलगु फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा| अपनी पहली डेब्यू फिल्म तेलगु में करने के बाद अगले ही साल रिया चक्रबर्ती ने बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा| साल 2013 में रिया चक्रवर्ती ने “आशिमा छिब्बर” की फिल्म “मेरे डैड की मारुती (Mere Dad ki Maruti) से बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया|


अगले ही साल 2014 में रिया चक्रवर्ती रोहन सिप्पी की फिल्म “सोनाली केबल” में लीड रोल में नज़र आई| इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद ही रिया चक्रवर्ती को अपनी असली पहचान हांसिल हो पाई|


हाल ही में साल 2017 में रिया चक्रवर्ती  फिल्म “बैंक चोर” में रितेश देशमुख और विवेक ओबेरॉय के अपोजिट नजर आई| इसके अलावा साल की एक ब्लॉगबस्टर फिल्म “हाफ गर्लफ्रेंड” में भी वे केमियो करती नज़र आई|


Rhea Chakraborty Movies
Rhea Chakraborty Movies

Rhea Chakraborty Movies | रिया चक्रवर्ती की फ़िल्में


2012 – डेब्यू तेलेगु फिल्म “तुनीगा तुनीगा”
2013 – मेरे डैड की मारुती (Mere Dad ki Maruti)
2014 – सोनाली केबल (Sonali Cable)
2017 – कैमियो “हाफ गर्लफ्रेंड” (Camio in Half Girlfriend)
2017 – दोबारा (Dobaara : See Your Evil”)
2017 – बैंक चौर (Bank Choor)



तो दोस्तों आपको हमारा यह आर्टिकल “रिया चक्रवर्ती बायोग्राफी | Biography of Rhea Chakraborty” कैसा लगा हमें Comment Section में ज़रूर बताएं और हमारा फेसबुक पेज  जरुर Like करें|


यह भी पढ़ें:- एप्पल मतलब स्टीव जॉब्स | Who is Steve Jobs




[ad_2]

Source link

Friday, 4 May 2018

कर्नाटक: पुलकेसिन, कृष्णदेव राय से लेकर टीपू सुल्तान, जनरल करियप्पा और बसवन्‍ना तक मैदान में!

कर्नाटक: पुलकेसिन, कृष्णदेव राय से लेकर टीपू सुल्तान, जनरल करियप्पा और बसवन्‍ना तक
मैदान में!
[ad_1]

नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव एक मामले में देश के अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से काफी अलग नजर आ रहा है. यहां इतिहास पुरुषों का जितनी शिद्दत और जितनी बड़ी तादाद में इस्तेमाल हो रहा है, वैसा अन्य कहीं नहीं दिखाई दिया. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब तक चालुक्य सम्राट पुलकेसिन द्वितीय, सम्राट हर्षवर्धन, कृष्णदेव राय, बहमनी साम्राज्य के सुल्तान, संत कवि बसवन्ना, संत कवि तिरुवल्लुवर, टीपू सुल्तान से लेकर आजाद भारत के पहले सेना अध्यक्ष मेजर जनरल करियप्पा तक का जिक्र हो चुका है. पार्टियां अपने सुभीते के हिसाब से इतिहास की व्याख्या कर रही हैं, और इतिहास पुरुषों को एक दूसरे से लड़ा रही हैं: 


पुलकेसिन द्वितीय बनाम सम्राट हर्षवर्धन 
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया जब बदामी विधानसभा सीट से पर्चा भरने पहुंचे तो वे अपने साथ चालुक्य सम्राट पुलकेसिन द्वितीय की तस्वीर भी ले गए. दरअसल सातवीं शताब्दी में दक्षिण भारत में चालुक्य साम्राज्य था. उधर उत्तर भारत में सम्राट हर्षवर्धन का राज्य था. पुलकेसिन को दक्षिणपथेश्वर और हर्ष को उत्तर पथेश्वर कहा जाता था. दोनों उपाधियों का अर्थ हुआ दक्षिण का स्वामी और उत्तर का स्वामी. उस जमाने में हर्ष ने जब दक्षिण में अपना राज्य विस्तार करने के लिए हमला किया तो पुलकेसिन ने हर्ष को हरा दिया. बाद में दोनों राजाओं के बीच हुई संधि में नर्मदा नदी को दोनों राज्यों की सीमा मान लिया गया. लेकिन सिद्दारमैया ने उस जमाने में चालुक्यों की राजधानी रही बदामी से पर्चा भरते समय कहा कि जिस तरह दक्षिण के पुलकेसिन द्वितीय ने उत्तर भारत के हर्ष वर्धन को हराया था वैसे ही कर्नाटक विधानसभा चुनाव में दक्षिण भारतीय उत्तर भारतीयों को हरा देंगे. इस तरह सिद्दरमैया ने खुद को पुलकेसिन और प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को हर्षवद़र्धन के प्रतीक के तौर पेश कर क्षेत्रवादी भावनाएं पनमाने की कोशिश की.


कृष्णदेव राय और बहमनी साम्राज्य:
14वीं से 17वीं शताब्दी तक जब उत्तर भारत में सल्तनत काल और मुगल काल चल रहा था तब दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य की तूती बोलती थी. कृष्णदेव राय इस साम्राज्य के सबसे प्रतापी शासक हुए. उस जमाने में विजयनगर उनके साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी जिसका वर्तमान नाम थंपी है. बीजेपी नेता श्रीरामलु बराबर विजयनगर साम्राज्य का वैभव लौटाने को चुनावी मुद्दा बनाते रहे हैं. बीजेपी का इलजाम है कांग्रेस सरकार ने विजयनगर साम्राज्य की विरासत की उपेक्षा की और बहमनी सुल्तानों को ज्यादा तरजीह दी है. बीजेपी ने एक ट्वीट कर बताया कि किस तरह विजयनगर साम्राज्य की विरासत को उसने पहली बार 50 रुपये के नोट की नई सीरीज में छापा है. बीजेपी विजयनगर बनाम बहमनी साम्राज्य के बहाने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को गर्माने की कोशिश कर रही है.


लिंगायत के बहाने बसवन्ना का जिक्र:
12वीं सदी के कन्नड़ संत बसवन्ना को लिंगायत समुदाय का संस्थापक माना जाता है. राज्य की कांग्रेस सरकार ने लिंगायत को अलग धर्म बनाने का प्रस्ताव पास कर बीजेपी के इस पारंपरिक वोट बैंक पर निशाना साधा है. बीजेपी के मुख्यमंत्री प्रत्याशी येदुरप्पा इसी समुदाय से आते हैं. हमेशा से अखंड हिंदू धर्म का समर्थन करती रही बीजेपी इस मुद्दे पर शुरू में बैकफुट पर आई, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान बासवेश्वरा, बसवन्ना का ही एक नाम, की मूर्ति का लोकार्पण कर पहली बार विदेश से ही किसी विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने का प्रयास किया. मजे की बात यह कि जिन संत बसवन्ना के नाम आज धर्म की सियासत हो रही है, उन्होंने अपने दौर में धर्म के पाखंड का विरोध कर वंचित तबके को सीधे ईश्वर के लिंग रूप से जोड़ने की पहल की थी.
 
टीपू सुल्तान
कर्नाटक का राजनीतिक संग्राम 7वीं सदी से शुरू होकर 18वीं सदी तक चला आता है. यहां विवाद मैसूर के टीपू सुल्तान को लेकर हो रहा है. अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ सबसे आधुनिक लड़ाई वाले भारतीय शासक और युद्ध में पहली बार रॉकेट का प्रयोग करने वाले टीपू सुल्तान को यहां हिंदू मुस्लिम के चश्मे से देखा जा रहा है. टीपू में वोट की संभावनाओं देखते हुए कांग्रेस सरकार ने दो साल पहले बड़े पैमाने पर टीपू जयंती के कार्यक्रम शुरू किए. इसके जवाब में बीजेपी ने कहा कि टीपू हिंदुओं पर जुल्म करने वाला जालिम था. पिछले साल दिसंबर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हुबली में कहा कि कांग्रेस टीपू सुल्तान की जयंती मनाती है, हनुमान जयंती नहीं मनाती. योगी ने कहा कि टीपू सुल्तान की जयंती मनाने वालों का नाम नहीं रहेगा.
 
संत तिरुवल्लुवर से लेकर जनरल करियप्पा तक : संत तिरुवल्लुवर तमिल संत हैं और पिछले एक हजार साल से ज्यादा समय से भारतीय मूल के सभी धर्म उन्हें खुद से जोड़कर बताते रहे हैं. संत तिरुवल्लुवर का तमिलनाडु बहुत मान है. कर्नाटक के बंगलौर जिले की शिवाजीनगर विधानसभा सीट पर तमिलों की अच्छी खासी आबादी है, ऐसे में दोनों पार्टियां खुद को तिरुवल्लुवर के ज्यादा करीद दिखा रही हैं.


दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में जनरल करियप्पा का जिक्र किया. जनरल करियप्पा आजाद भारत के पहले सेनाध्यक्ष थे और आजादी के तुरंत बाद कश्मीर पर हुए कबायली हमले को रोकने का काम उन्हीं के नेतृत्व में हुआ था. सेना के इस्तेमाल को लेकर जनरल करियप्पा और महात्मा गांधी में हुआ संंवाद हिंसा और अहिंसा की बहस का महत्वपूर्ण पाठ माना जाता है.




[ad_2]

Source link