Friday, 4 May 2018

किम जोंग ने घड़ी की सुइयों को आधा घंटा बढ़ाया, फिर से एक हुआ उत्तर एवं दक्षिण कोरिया का टाइम

किम जोंग ने घड़ी की सुइयों को आधा घंटा बढ़ाया, फिर से एक हुआ उत्तर एवं दक्षिण
कोरिया का टाइम
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सियोल: उत्तर कोरिया ने शनिवार (5 मई) को अपनी घड़ी की सुइयां आधा घंटा आगे बढ़ाते हुए अपना टाइम जोन दक्षिण कोरिया के टाइम जोन के अनुरूप कर लिया. उत्तर कोरिया ने यह कदम दोनों देशों के बीच सुलह की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए उठाया है. समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, टाइम जोन में यह बदलाव उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन को यह बताने के एक सप्ताह बाद हुआ है कि वह अंतर कोरियाई सुलह और एकता को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के टाइम जोन्स को एक करना चाहते हैं. यह फैसला आधी रात से प्रभावी हुआ.


उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने एक बयान जारी कर कहा, "प्रेसिडयम ऑफ द सुप्रीम पीपुल्स असेंबली ऑफ उत्तर कोरिया के आदेश के मुताबिक, प्योंगयांग के समय को पुनर्निर्धारित किया गया है और यह पांच मई से प्रभावी हो गया. बयान के मुताबिक, "उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक बैठक के बाद दोनों देशों के टाइम जोन को एक करना पहला व्यवहारिक कदम है."


उत्तर कोरिया ने अगस्त 2015 में अपने मानक समय को दक्षिण कोरिया के समय के 30 मिनट पीछे कर दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि ऐसा 1910-1945 के बीच जापान के कोरियाई प्रायद्वीप पर शासन के निशानों को हटाने के लिए किया गया. इससे पहले दोनों कोरियाई देशों में एक समान मानक समय ही था.


ट्रंप 22 मई को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से मिलेंगे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 22 मई को व्हाइट हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन से मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ट्रंप की किम जोंग उन से होने जा रही मुलाकात से पहले हो रही है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा हकाबी सैंडर्स ने जारी बयान में कहा, "दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी मुलाकात अमेरिका, दक्षिण कोरिया के मजबूत होते संबंधों और गहरी होती दोस्ती को दर्शाता है."


समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, ट्रंप और मून कोरियाई प्रायद्वीप के संदर्भ में विभिन्न मुद्दों पर समन्वय बनाए रखेंगे और 27 अप्रैल को हुए अंतर कोरियाई सम्मेलन और किम जोंग के साथ ट्रंप की आगामी बैठक पर चर्चा करेंगे. इससे पहले शुक्रवार (4 मई) को ट्रंप ने कहा था कि किम जोंग उन के साथ मुलाकात का समय और तारीख निर्धारित कर ली गई है और जल्द ही इसके बारे में सूचित किया जाएगा.




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Justice R K. Agrawal says, independence of the Judiciary One of the foundations of democracy । न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद में से एक : न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल

Justice R K. Agrawal says, independence of the Judiciary One of the
foundations of democracy । न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद में से
एक : न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीश आर के अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद में से एक है और बार की स्वतंत्रता न्यायपालिका की स्वतंत्रता की पूर्व शर्त है. न्यायमूर्ति अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में चार साल के कार्यकाल के बाद शुक्रवार (4 अप्रैल) सेवानिवृत्त हुए. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र समाज के लिये बार और बेंच अपरिहार्य हैं. न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा , ‘‘ न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद में से एक है और वकीलों ने लोकतंत्र के स्तंभ को कायम रखने के लिये कठोर प्रयास किया है. बार की स्वतंत्रता न्यायपालिका की स्वतंत्रता की पूर्व शर्त है , जिसके जरिये अगर जरूरत पड़ी तो उनकी स्वतंत्रता का समर्थन किया जा सकता है. ’’ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने विदाई भाषण में यह बात कही.


प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने आज कहा कि न्यायाधीशों का यह कर्तव्य है कि वे वकीलों के प्रति सम्मान दिखाएं , भले ही उनकी आयु या दर्जा कुछ भी हो. न्यायमूर्ति मिश्रा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे. उन्होंने कहा , ‘‘ सुप्रीम कोर्ट एक है. बार हमें प्रोत्साहित करता है और हर मौके पर हमने बार के युवा सदस्यों से कहा है कि वे मार्गदर्शक फरिश्ता बनें. यह उम्र नहीं बल्कि बार में प्रवेश आपको महत्वपूर्ण बनाता है. आपका चाहे कोई भी कद या दर्जा हो , आप सम्मान के हकदार हैं और यह न्यायाधीशों का कर्तव्य है कि वे बार के सदस्यों के प्रति सम्मान प्रकट करें , भले ही उनकी उम्र या दर्जा कुछ भी हो. ’’ 


न्यायमूर्ति अग्रवाल पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा , ‘‘ वह एक काम से मुक्त हो रहे हैं --- अगर आप ईर्ष्या महसूस कर रहे हैं तो आप उनका बहिष्कार कर रहे हैं. अगर आप उद्विग्न हैं तो आप उन्हें काम करने के लिये पांच साल और दे दें. कब , कहां और कैसे , मैं नहीं कह सकता. ’’ उन्होंने कहा , ‘‘ लेकिन अगर यह बार की इच्छा है तो आपको जरूर मिलेगा. मैं इसे बार की ओर से सहमति मानता हूं कि आप उन्हें कहीं और देखना चाहते हैं. मुझे उम्मीद है कि इसमें कोई असहमति नहीं है. ’’ 


न्यायमूर्ति अग्रवाल उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. उन्हें 17 फरवरी 2014 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई गई थी. न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा कि युवा वकील ‘‘ कानूनी वातावरण की ऑक्सीजन हैं. ’’ उन्होंने कहा , ‘‘ अगर हम उन्हें ड्राफ्ट करने और दलील पेश करने का उचित मौका देते हैं तो यह उन्हें अधिक जिम्मेदारियां लेने में सक्षम बनाएगा. युवा वकील कानूनी वातावरण की ऑक्सीजन हैं. ’’ न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा , ‘‘ बार और बेंच का संबंध एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. न ही एक को दूसरे पर प्राथमिकता हासिल है. दोनों मुक्त समाज के लिये अपरिहार्य हैं. ’’ 


(इनपुट भाषा)




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Time Match of North Korea and South Korea । ZEE जानकारीः दोनों नेताओं की मुलाकात के एक हफ्ते बाद North और South Korea समय भी मिला

Time Match of North Korea and South Korea । ZEE जानकारीः दोनों नेताओं की
मुलाकात के एक हफ्ते बाद North और South Korea समय भी मिला
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पिछले हफ़्ते North Korea और South Korea ने अपनी 68 साल पुरानी दुश्मनी को भूलकर एक दूसरे से हाथ मिलाया था. अब करीब एक हफ़्ते बाद इन दोनों देशों ने अपनी घड़ियां मिला ली हैं. North Korea और South Korea के रिश्तों वाली घड़ी 68 वर्षों से रुकी हुई थी. लेकिन, अब वक़्त बदल गया है. दीवार पर टंगी दो घड़ियों की ये तस्वीर 29 अप्रैल 2018 की है. ये उसी Peace House की तस्वीर है, जहां North Korea के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और South Korea के राष्ट्रपति Moon Jae-in की मुलाकात हुई थी. अगर आप दोनों घड़ियों को ध्यान से देखेंगे, तो ये पाएंगे, कि दोनों के समय में आधे घंटे का अंतर है. 


बांई तरफ की घड़ी South Korea के मुताबिक 11 बजकर 45 मिनट का समय दिखा रही है. जबकि दांई तरफ की घड़ी में North Korea के मुताबिक 11 बजकर 15 मिनट का समय दिख रहा है. अब आधे घंटे के इस फर्क की वजह को समझिए. किम जोंग उन.. ने वर्ष 2015 में Pyongyang Time बनाया था. इसके तहत North Korea ने अपना मानक समय South Korea से 30 मिनट पीछे कर लिया था. यानी पिछले 3 वर्षों से North Korea का समय South Korea से आधे घंटे पीछे चल रहा था. 


किम जोंग उन.. ने ये फैसला इसलिए लिया था, क्योंकि उपनिवेश काल से पहले North Korea का यही Time Zone, हुआ करता था. सन 1910 से लेकर 1945 तक North Korea पर जापान का शासन था. और उस वक्त जापान ने North Korea के Time को Tokyo के बराबर करने के लिए उसे आधा घंटा आगे कर दिया था. वर्ष 1945 में जापान के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने के बावजूद, North Korea का Time Zone वर्ष 2015 तक नहीं बदला गया. फिर किम जोंग उन.. ने इस समय को अपने इतिहास के मुताबिक ठीक किया.


27 अप्रैल 2018 को जिस वक्त नॉर्थ और साउथ कोरिया के नेताओं की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें दुनिया देख रही थीं. उस वक्त किम जोंग उन थोड़े उदास थे. क्योंकि, जिस कमरे में बैठकर वो South Korea के राष्ट्रपति का इंतज़ार कर रहे थे, उसी कमरे की दीवार पर ये दोनों घड़ियां टंगी हुई थीं. Media रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने उस दिन ये कहा था, कि दीवार पर टंगी हुई घड़ियों में Seoul Time और Pyongyang Time देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई. और उसी वक्त उन्होंने ये फैसला किया, कि दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए, घड़ियों का समय मिलाना ज़रुरी है.


North Korea की आधिकारिक समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम जोंग उन ने South Korea के Time Zone के हिसाब से वक्त मिलाने के लिए, अपने देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने का फैसला लिया. वहां की संसद ने भी South Korea के Time Zone को अपनाने पर अपनी मंज़ूरी दे दी थी. और अब से कुछ देर पहले दोनों देशों की घड़ियों का वक्त एक जैसा हो गया है. North Korea का समय भारत के मुकाबले 3 घंटे आगे चलता है. इसलिए वहां पर तारीख बदल चुकी है, वहां पर 5 मई की तारीख शुरू हो चुकी है. 


South Korea ने किम जोंग उन के इस फैसले की तारीफ की है और कहा है, कि इस प्रतीकात्मक कदम से दोनों देशों के रिश्ते और भी ज़्यादा मज़बूत होंगे. इसके लिए South Korea ने भी एक अहम फैसला लिया है. जिसके तहत, वो अपने सीमावर्ती इलाकों में North Korea के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Loudspeakers को हटा लेगा. इन दोनों ही देशों ने, Propaganda करने के लिए अपनी सरहदों पर सैकड़ों लाउडस्पीकर्स लगाए हुए हैं. लेकिन अब इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया गया है.




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तालिबान ने बोला धावा, अफगानिस्तान के एक और जिले पर किया कब्जा

तालिबान ने बोला धावा, अफगानिस्तान के एक और जिले पर किया कब्जा
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काबुल: तालिबान ने अफगानिस्तान के उत्तरी प्रांत बदख्शां में एक और जिले पर कब्जा कर लिया है. अफगानिस्तान के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. प्रांतीय परिषद के सदस्य अब्दुल्ला नाजी नजारी ने कहा कि आतंकवादियों ने गुरुवार को सामरिक रूप से अहम कोहिस्तान जिले पर अचानक धावा बोल दिया. यह जिला प्रांतीय राजधानी फैजाबाद के रास्ते पर पड़ता है. नजारी ने बताया कि हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. बदख्शान में तालिबान के कब्जे वाला यह तीसरा जिला है.


इस प्रांत में करीब 24 जिले हैं. नजदीक के ही उत्तरी बल्ख प्रांत में सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अनीफ रेजाइ ने कहा कि सुरक्षाबल फैजाबाद में पहुंच गए हैं लेकिन वह क्षेत्र में खराब मौसम के कारण तालिबान के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेशों का इंतजार कर रहे हैं. 


तालिबान ने सरकार की शांति वार्ता की पेशकश ठुकराई
तालिबान ने हर साल की तरह ही इस साल भी वसंत के मौसम में फिर से अपने हमलों को तेज कर दिया है. तालिबान के बुधवार(25 अप्रैल) से शुरू हुए इन हमलों से लगता है कि उसने अफगानिस्तान सरकार की शांति वार्ता की पेशकश को ठुकरा दिया था. तालिबान के एक बयान के मुताबिक उसका ‘आपरेशन अल खंदक’ अमेरिकी बलों को, उनके ‘‘खुफिया एजेंटों’’ और साथ ही साथ उनके ‘‘अंदरूनी हिमायतियों’’ को निशाना बनाएगा. आम तौर पर जाड़े में हमलों का सिलसिला बंद हो जाता है और वसंत में शुरू हो जाता है. बहरहाल, इस साल तालिबान ने अफगान और अमेरिकी बलों पर अपना हमला जारी रखा था.


तालिबान ने कहा कि आपरेशन अल खंदक में ‘‘अमेरिकी आक्रांताओं और उनके समर्थकों को कुचलने, मारने और पकड़ने’’ पर जोर होगा. तालिबान ने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिकी अड्डों की मौजूदगी ‘‘शांति के सभी मौके को खत्म’’ करती है और ‘‘जारी जंग लंबी’’ करती है. 


पुलिस चौकी पर तालिबान ने छह की हत्या की
इससे पहले 21 अप्रैल की अफगानिस्तान के सरी पुल प्रांत में एक पुलिस चौकी पर तालिबान लड़ाकों के हमले में छह स्थानीय पुलिसकर्मियों की मौत हो गई. एक अफगान अधिकारी ने यह जानकारी दी. प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता जबी अमानी ने कहा कि बीती देर रात हुये हमले में दो अन्य पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं.


अमानी ने कहा कि इलाके में अतिरिक्त बलों को भेजा गया है और सयाद जिले में कुछ - कुछ जगहों पर अब भी गोलीबारी जारी है. उन्होंने कहा कि तीन तालिबानी लड़ाके इस दौरान मारे गए हैं जबकि दो अन्य घायल भी हुए हैं. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने हमले की जिम्मेदारी ली है.


इनपुट भाषा से भी 




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