Friday, 4 May 2018

Us Military Pilots Hits In Africa By Chinese Lasers Says Trump Administration - अमेरिकी विमानों पर चीनी सैनिकों का लेजर हमला, दो पायलट जख्मी

Us Military Pilots Hits In Africa By Chinese Lasers Says Trump
Administration - अमेरिकी विमानों पर चीनी सैनिकों का लेजर हमला, दो पायलट जख्मी
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अफ्रीका के जिबूती में स्थित चीन के सैन्य बेस पर मौजूद सैनिकों ने एक अमेरिकी विमान पर लेजर हमला कर दिया। इसमें दो अमेरिकी वायुसैनिक घायल हो गए। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। 

पेंटागन की प्रवक्ता डाना डब्ल्यू वाइट ने कहा कि लेजर हमले में सी-130 विमान में सवार दो वायुसैनिक घायल हुए हैं। उन्हें यकीन है कि इसके पीछे चीन के सैनिक हैं। डान ने यह भी बताया कि दो से ज्यादा और दस से कम बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। हाल के हफ्तों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। 

उन्होंने चीन के समक्ष इसका आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह लेजर पायलटों को कुछ समय के लिए अंधा भी कर सकता है। पेंटागन का आरोप है कि यह लेजर सैन्य स्तर का था, जिससे दो अमेरिकी पायलट घायल हो गए।
 
उधर, चीन के रक्षा और विदेश मंत्रालय ने अलग-अलग बयान जारी करके इन आरोपों को आधारहीन करार देते हुए नकार दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, अमेरिका में कुछ लोगों को तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। न की ऐसे झूठे आरोप लगाने चाहिए। ज्ञात हो कि 2017 में चीन ने जिबूती में सैन्य बेस बनाया था, जिसके बाद पहली बार अमेरिका से उसका टकराव हुआ है। यहां अमेरिका के भी चार हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। 


चीन द्वारा दक्षिण सागर की तीन चौकियों पर एंटी शिप क्रूज मिसाइलें और जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम तैनात करने के बाद अमेरिका भड़क गया है। क्षेत्र में ताजा सैन्यीकरण पर अमेरिका ने चिंता जताते हुए चीन को चेतावनी दी है कि उसे निकट व दूरगामी अवधि में इसके नतीजे भुगतने होंगे।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा कि हम दक्षिण चीन सागर में चीन के सैन्यीकरण से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हमने इस मुद्दे को प्रत्यक्ष रूप से चीनी नेतृत्व के सामने उठाते हुए उसे अंजाम भुगतने की चेतावनी दी हैै। हालांकि सैंडर्स ने यह नहीं बताया कि चीन को क्या परिणाम भुगतने होंगे। 

एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह भी बताया कि हमें यह सूचना भी मिली है कि चीन ने स्प्राली द्वीपों पर पिछले माह चीन ने कुछ हथियार सिस्टम भी तैनात किए हैं। इनमें चट्टान भेदी फायरिंग उपकरण और खतरनाक हथियार शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक चीन ने पिछले दिनों इस क्षेत्र में सात आइलैंड, मिसाइल स्टेशन, हैंगर और रडार स्टेशन बना चुका है। राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा भी अपने कार्यकाल के दौरान दक्षिण चीन सागर पर चीन के बढ़ते कब्जे को लेकर विरोध जता चुके हैं। पश्चिमी प्रशांत सागर में भी चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के चलते अमेरिका को चुनौती देता रहा है।


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने भी विवादित क्षेत्र में चीनी सैन्य निर्माण पर चिंता जताई है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता दाना व्हाइट ने संवाददातों से कहा, हम इन कृत्रिम द्वीपों के सैन्यीकरण से जुड़ी चिंताओं के बारे में बहुत मुखर हैं। चीन को यह महसूस करना होगा कि उन्हें समुद्र के नि:शुल्क नेविगेशन से फायदा हुआ है और अमेरिकी नौसेना इसके गारंटर हैं।

एडवांस हथियारों का प्रदर्शन कर चुका है चीन
बृहस्पतिवार को चीन ने विवादित तीन चौकियों पर मिसाइलों की तैनाती को सही ठहराया है। उसने कहा कि दक्षिण सागर पर चीन की निर्विवाद संप्रभुता है। यहां चीन अप्रैल में अब तक का अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास भी कर चुका है। यहां पहली बार चीन के विमानवाहक हमला समूह और पीएलए के सबसे एडवांस हथियारों का प्रदर्शन किया गया है। 



अफ्रीका के जिबूती में स्थित चीन के सैन्य बेस पर मौजूद सैनिकों ने एक अमेरिकी विमान पर लेजर हमला कर दिया। इसमें दो अमेरिकी वायुसैनिक घायल हो गए। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। 


पेंटागन की प्रवक्ता डाना डब्ल्यू वाइट ने कहा कि लेजर हमले में सी-130 विमान में सवार दो वायुसैनिक घायल हुए हैं। उन्हें यकीन है कि इसके पीछे चीन के सैनिक हैं। डान ने यह भी बताया कि दो से ज्यादा और दस से कम बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। हाल के हफ्तों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। 

उन्होंने चीन के समक्ष इसका आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह लेजर पायलटों को कुछ समय के लिए अंधा भी कर सकता है। पेंटागन का आरोप है कि यह लेजर सैन्य स्तर का था, जिससे दो अमेरिकी पायलट घायल हो गए।
 
उधर, चीन के रक्षा और विदेश मंत्रालय ने अलग-अलग बयान जारी करके इन आरोपों को आधारहीन करार देते हुए नकार दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, अमेरिका में कुछ लोगों को तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। न की ऐसे झूठे आरोप लगाने चाहिए। ज्ञात हो कि 2017 में चीन ने जिबूती में सैन्य बेस बनाया था, जिसके बाद पहली बार अमेरिका से उसका टकराव हुआ है। यहां अमेरिका के भी चार हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। 







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भड़का अमेरिका, नतीजों की चेतावनी







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जिबूटी में चीन के लेजर हमले में हमारे 2 पायलट जख्मी हुए: अमेरिका; बीजिंग ने कहा- आरोप बेबुनियाद

जिबूटी में चीन के लेजर हमले में हमारे 2 पायलट जख्मी हुए: अमेरिका; बीजिंग ने कहा- आरोप
बेबुनियाद
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अमेरिका ने चीन पर उसके एयरक्राफ्ट पर हाईग्रेड लेजर से हमला करने का आरोप लगाया। शुक्रवार को इसके लिए अमेरिका ने चीन से शिकायत भी की है। पेंटागन के प्रवक्ता के मुताबिक, यह हमला लाल सागर के पास स्थित जिबूटी मिलिट्री बेस के नजदीक हुआ। इसमें दो अमेरिकी पायलट जख्मी हुए। दूसरी ओर, चीन ने इन आरोपों को नकारा है। बता दें कि जिबूटी में अमेरिका का मिलिट्री और चीन का नेवी बेस है।


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Thursday, 3 May 2018

परमाणु ऊर्जा आयोग की बस पर आतंकी हमले में 2 की मौत, तालिबान पर शक

परमाणु ऊर्जा आयोग की बस पर आतंकी हमले में 2 की मौत, तालिबान पर शक
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के परमाणु ऊर्जा आयोग की एक बस को मोटरसाइकिल सवार एक आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि हमलावर ने पहले बस पर गोलियां दागी और अटक जिले में ब्रेकर की वजह से जैसे ही बस की गति कम हुई, उसने बस के निकट जाकर खुद को उड़ा लिया.


उन्होंने बताया, “बस के चालक और वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति की इस घटना में मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए. घायलों में ज्यादातर पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग के कर्मचारी हैं.” टीवी फुटेज में दिखाया गया है कि बस का चालक वाला हिस्सा इस आत्मघाती हमले में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया.


पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने घटनास्थल पर पहुंचकर इस क्षेत्र की घेराबंद कर ली है. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हमलावर के साथ उसका कोई सहयोगी था या नहीं. इस हमले की जिम्मेदारी किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन तालिबानी आतंकवादी पूर्व में इस तरह के हमलों में शामिल रहे हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस हमले की निंदा की है.


पाकिस्तान में आईडी विस्फोट में तीन सुरक्षा कर्मी घायल
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के अशांत उत्तरी-पश्चिमी आदिवासी क्षेत्र में गुरुवार (3 मई) को आईईडी विस्फोट में तीन सुरक्षा कर्मी घायल हो गये. अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बान्नू जिले के जानी खेल इलाके में तीन सुरक्षाकर्मी गश्त पर थे जब उनकी गाड़ी आईईडी से टकरा गई.


अधिकारियों ने बताया कि आईईडी को आतंकवादी रिमोट कंट्रोल से संचालित कर रहे थे. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया है.




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RSS workers attack on photo journalist in malappuram । केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं ने फोटो पत्रकार पर किया ‘हमला’

RSS workers attack on photo journalist in malappuram । केरल में आरएसएस
कार्यकर्ताओं ने फोटो पत्रकार पर किया ‘हमला’
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पुलिस ने बताया कि आरएसएस के 10 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता ( आईपीसी ) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.





केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं ने फोटो पत्रकार पर किया ‘हमला’

फाइल फोटो







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स्कूली बस पर नहीं, कश्मीरियों के तालीम के सपने पर हमला है

स्कूली बस पर नहीं, कश्मीरियों के तालीम के सपने पर हमला है
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कश्मीर के शोपियां में स्कूली बच्चों की बस पर पत्थरबाजी की घटना जितनी दुखद और जघन्य है, उतनी ही आश्चर्यजनक भी है. क्योंकि तालीम को लेकर कश्मीर का मिजाज अलग है. एक आम कश्मीरी अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी तालीम देना चाहता है, उसे अच्छे से अच्छे स्कूल में भेजना चाहता है. जो लोग कश्मीर से वाकिफ हैं वे इस बात को बखूबी जानते हैं. जो वहां नहीं गए हैं, उन्हें जानकर ताज्जुब होगा कि अगर आप श्रीनगर में घूमने निकल जाएं तो इंग्लिश मीडियम या कानवेंट कल्चर के स्कूलों की अच्छी तादाद दिखाई देगी. आमतौर पर कश्मीरी लोग भले ही पारंपरिक परिधान फिरन, एक लंबा सा चोगा, पहने नजर आएं, लेकिन जब पढ़ाई की बात आती है तो वे मदरसों को नहीं, इंग्लिश मीडियम स्कूल या सरकारी स्कूलों का रुख करते हैं. 


कई कानवेंट स्कूलों की इमारतें और सुविधाएं देखकर आप को लगेगा कि आप देहरादून के मशहूर स्कूलों को देख रहे हैं. स्कूली बच्चों के परिधान पारंपरिक नहीं होते हैं. लड़के लड़कियां पेंट शर्ट या स्कर्ट टॉप के साथ नीले या हरे रंग का ब्लेजर पहने दिखेंगे. हां, लड़कियां सिर पर पारंपरिक स्कार्फ जरूर लगाती हैं. उनके पास वैसे ही भारी स्कूल बैग होंगे जैसे देश के बाकी शहरी इलाकों के बच्चों के कंधों पर टंगे रहते हैं. चिनार के ऊंचे दरख्तों के साए में जब कोई स्कूली बस आपके बगल से गुजरती है और उसमें से सेब से लाल गालों वाले बच्चों का हल्ला-गुल्ला सुनाई देता है तो कश्मीर के भविष्य की बहुत आश्वस्तकारी तस्वीर जेहन में उभरती है.


आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि सेना ने यहां के दूरदराज इलाकों में जितने स्कूल खोले हैं उन सब में बच्चों का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों में होड़ लगी रहती है. और सबसे ज्यादा दिलचस्प नजारा तो श्रीनगर में बने सेना के मुख्यालय के सामने रहता है. सबसे ज्यादा सुरक्षा इंतजाम और सबसे ज्यादा आतंकवादी खतरे का अंदेशा झेलने वाले इस मुख्यालय में सेना का स्कूल भी है. इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने के लिए कश्मीर के आम आदमी से लेकर रसूखदार लोगों तक में होड़ लगी रहती है. लेखक जब कुछ महीने पहले कश्मीर गया था तो सेना के एक अफसर ने बताया था कि वे ऐसे बहुत से अलगावादियों को जानते हैं जिन्होंने बड़ी सिफारिशें लगाकर सेना के स्कूल में अपने बच्चों का दाखिला कराया है. जब बात बच्चों के भविष्य की आती है तो अलगावादियों को भी सेना के स्कूल और नई तरह की तालीम पर ज्यादा भरोसा रहता है.


आपको ऐसे बहुत से कश्मीरी मिल जाएंगे जो हायर एडुकेशन के लिए अपने बच्चों का देश के दूसरे हिस्सों में भेजना चाहते हैं. देश की बहुत सी यूनिवर्सिटीज में आपको ऐसे कश्मीरी छात्र मिल जाएंगे जो भारत सरकार की उड़ान स्कीम तहत यहां पढ़ रहे हैं. एक बार एक उम्रदराज कश्मीरी ने लेखक से कहा था कि वह चाहता है कि उसके बच्चे इस खुली जेल से बाहर निकलें और बाकी भारत के बच्चों को देखें. वहां के रहन-सहन और तौर-तरीके समझें. वे महसूस तो करें कि वे सड़कें कैसी होती हैं जिनकी चौकीदारी के लिए हमेशा बखतरबंद वर्दी पहने हथियारबंद सिपाही तैनात नहीं होते. और उसे अच्छी तरह पता है कि इस खुली जेल से रिहाई की अगर कोई पहली सीढ़ी है तो वह है तालीम. इसीलिए कश्मीर में कभी स्कूली बच्चों को आतंकवादियों का निशाना नहीं बनना पड़ा.


स्कूली बस पर पत्थरबाजी कर अलगावादियों ने आम कश्मीरी की हसरतों पर हमला किया है. यह हमला अगर एक चुनौती है तो एक बड़ी संभावना भी है. संभावना इस रूप में कि भारत के सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में बंदूके के दम पर सेना पार से चल रहे आतंकवाद को बुरी तरह कुचला है. इसके तोड़ में पाकिस्तान ने भारत में रह रही अपनी स्लीपर सेल को सक्रिय किया है. पिछले कुछ महीने में मारे गए ज्यादातर आतंकवादी विदेशी न होकर भारतीय मूल के हैं. 


जाहिर है स्थानीय होने के कारण इन्हें स्थानीय सहानुभूति भी मिलती है. लेकिन बच्चों पर हमले के बाद अगर भारत सरकार मानवीय संवाद को बढ़ावा दे तो इस सहानुभूति का रुख आतंकवादियों के बजाय भारत राष्ट्र की तरफ हो सकता है. यह संकट को अवसर में बदलने का मौका है. पत्थरबाजों की चोट से लहुलुहान मां बाप को यह भी बताने का मौका है कि वे अपने बच्चों को तालीम का रास्ता दिखाना चाहते हैं और अलगाववादी उन्हें तालिबान के रास्ते ले जाना चाहते हैं. लेकिन ये बातें सेना नहीं सांस्कृतिक संवाद से समझाई जा सकती है.




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Wednesday, 2 May 2018

लीबिया: चुनाव आयोग पर हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत, IS ने ली हमले की जिम्मेदारी

लीबिया: चुनाव आयोग पर हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत, IS ने ली हमले की
जिम्मेदारी
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लीबिया की राजधानी त्रिपोली में चुनाव आयोग के कार्यालय पर हुए हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई.





 लीबिया: चुनाव आयोग पर हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत, IS ने ली हमले की जिम्मेदारी

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि राष्ट्रीय चुनाव आयोग के मुख्यालय से गोलियों की आवाज सुनाई दी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)







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