Saturday, 5 May 2018

karnataka elections 2018 s m krishna supporters and relatives left bjp joined congress

karnataka elections 2018 s m krishna supporters and relatives left bjp
joined congress
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक दौरे के दौरान गुरुवार 3 अप्रैल को बेंगलुरू में पूर्व सीएम एस एम कृष्णा के साथ मंच पर नजर आए थे. कर्नाटक चुनाव से पहले पूर्व सीएम और पीएम के साथ दिखने को पार्टी के कर्नाटक में अपनी पकड़ बनाने के लिए उठाए गए मजबूत कदम के रूप में देखा गया. लेकिन बीजेपी के लिए कर्नाटक चुनाव में जीत हासिल करने की राह आसान नहीं होने वाली है. बेंगलुरु से महज 65 किलोमीटर दूर एस एम कृष्णा के ही गृहनगर मद्दुरु में बीजेपी बड़ी मुश्किल का सामना कर रही है. राज्य में खुला सबसे पहला पार्टी ऑफिस अब बंद हो चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि एस एम कृष्णा के समर्थक जो उनके साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे, उन्होंने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया है.


नाराज होकर पिछले साल छोड़ी थी कांग्रेस
साल 2017 में एस एम कृष्णा सहित बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने कांग्रेस से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी थी. इन समर्थकों में से कई कृष्णा के रिश्तेदार भी थे. लेकिन एक हफ्ते ये वापस कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व की ओर से उन्हें उपेक्षित किया गया, जिस कारण उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला लिया. इसके साथ ही कर्नाटक में पांव जमाने के इरादे से मद्दुरु में खोला गया पहला बीजेपी ऑफिस और उसकी कमान संभालने वाले वहां के पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण कुमार को पार्टी ने खो दिया.


टिकट नहीं मिलने से नाराज मद्दुरु अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, लक्ष्मण कुमार जिन्हें बीजेपी ने मद्दुरु का चीफ बनाया था उन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी का साथ छोड़ा. कुमार ने बताया कि, 'बीजेपी का इस इलाके में अस्तित्व भी नहीं था. मैंने मेहनत करके लगभग पूरे संगठन को तैयार किया. मुझसे वादा किया गया था कि मुझे टिकट दिया जाएगा, लेकिन अचानक किसी को और को चुन लिया गया. मैंने अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन बीजेपी की ओर से कोई इस पर बात करने को तैयार नहीं था. इस वजह से मैं कांग्रेस में आ गया.'


जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मण कुमार की जगह बीजेपी ने सतीश को टिकट दिया है. लेकिन कुमार के जाने से अब इलाके में पार्टी का ऑफिस ही नहीं रह गया है. बीजेपी छोड़ने पर न सिर्फ कार्यालय से पार्टी का बोर्ड बल्कि उस पर लगे झंडे और सीएम उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा आदी के फोटो भी हटा दिए गए. अब इस इमारत पर कांग्रेस का झंडा लगा दिया गया है. इस बीच सतीश ने एक रिहायशी इलाके में अपना ऑफिस बनाया है.


एस एम कृष्णा के भतीजे भी कांग्रेस में हुए शामिल
एस एम कृष्णा के भतीजे गुरुचरण भी बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वालों में से एक हैं. उन्होंने बताया कि 'मेरे समर्थकों और मैंने निष्पक्ष रहने का फैसला किया था. लेकिन एस एम कृष्णा को जहां पीएम मोदी का साथ मिला वहीं गृहनगर में खुद को अकेला पाकर हम कांग्रेस में शामिल हो गए.' गुरुचरण ने आगे कहा कि 'एक साल पहले चाचा एस एम कृष्णा के साथ पार्टी छोड़ने पर हमसे किसी ने भी संपर्क नहीं किया. हम आखिर तक इंतजार करते रहे लेकिन कांग्रेस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. कुछ दिनों पहले खुद सीएम सिद्धारमैया ने फोन कर कांग्रेस में वापस शामिल होने का अनुरोध किया, जिसे हमने मान लिया. हमें लगता है कि इस तरीके से हम बेहतर तरीके से विपक्षी पार्टी जेडी(एस) का सामना कर पाएंगे और लोगों के लिए भी कुछ अच्छा कर सकेंगे.'


भले ही एस एम कृष्णा के समर्थक व उनके रिश्तेदारों ने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया हो, लेकिन वे खुद भाजपा के साथ बने रहेंगे. सूत्रों की मानें तो रैली के दौरान पीएम मोदी के साथ कर्नाटक पूर्व सीएम का मंच पर दिखाई देना इसका साफ इशारा था.


कर्नाटक चुनाव से पहले बीजेपी ने पार्टी को मजबूती देने के लिए एस एम कृष्णा को अपने साथ शामिल किया था. साल 1999 से 2004 तक राज्य के सीएम रहने वाले कृष्णा के जरिए पार्टी अपनी छवि मजबूत करना चाहती थी. लेकिन कुछ रैलियों के अलावा वे बीजेपी के किसी भी अन्य चुनावी प्रचार में कम ही नजर आए हैं.




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Narendra Modi Rallies Karnataka Assebly Election Bjp Congress News And Updates

Narendra Modi Rallies Karnataka Assebly Election Bjp Congress News And
Updates
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बेंगलुरु.नरेंद्र मोदी शनिवार को कर्नाटक के टुमकुर में कहा कि कांग्रेस कई सालों तक गरीब-गरीब चिल्लाती रही। लेकिन जब देश ने एक गरीब परिवार के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन लिया तो उसने ये कहना बंद कर लिया। मोदी आज कर्नाटक में गड़ाग, शिमोगा और मैंगलुरु में भी सभाएं करेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान होगा, 15 को नतीजे आएंगे।

वो तो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं

- मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, "अब कांग्रेस वालों ने ऊपर से नीचे तक, लोकल हो, देशी हो या विदेशी हो, इधर से हो या उधर से हो, समझ हो या न हो, चना का पेड़ होता है या पौधा होता है, लाल मिर्च होती है या हरी, इसका भी जिनको ज्ञान नहीं है। जो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं। वो अब दिन-रात किसान-किसान बोल रहे हैं।"
- "इंदिरा गांधी के समय से लेकर कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए गरीबों को मूर्ख बना रही है। कांग्रेस एक झूठ बोलने वाली पार्टी है। वे एक बार फिर चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। न तो उन्हें किसानों की चिंता है और न ही गरीबों की। लोग अब कांग्रेस से थक चुके हैं।"
- "कर्नाटक के लोगों को कांग्रेस और जेडीएस के अनकहे गठबंधन को समझना चाहिए। वे लड़ते दिख तो रहे हैं लेकिन बेंगलुरु में जेडीएस, कांग्रेस के एक मेयर को समर्थन कर रही है।"

टुमकुरु महान लोगों की भूमि
- मोदी ने कहा, "टुमकुरु महान लोगों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं यहां आया था और सिद्धगंगा मठ के स्वामी शिवकुमार का आशीर्वाद लिया था।"

- "टुमकुरु के लोगों को हेमावती नदी का पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? सिंचाई के क्षेत्र में बीते 30 साल से कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस की रुचि तो केवल कालाधन भरने में है। "



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Friday, 4 May 2018

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव: मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव:
मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश
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कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।

फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।


बीजेपी की कोशिश कांग्रेस के अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदूइदावरू यानी ओबीसी और दलित) के गढ़ में सेंध लगाने की है। उन्हें उम्मीद है कि उसके दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक का एक हिस्सा जद (स) को जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं पिछड़ी कुरुबा जाति से हैं। प्रधानमंत्री मोदी उसके ओबीसी कार्ड का मजबूत काट हैं।

दक्षिण का मायाजाल

बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि दक्षिण कर्नाटक की फिलहाल जद (स) बनाम कांग्रेस लड़ाई को यदि वे त्रिकोणीय बना सकें तो चुनावी नतीजे अलग ही आएंगे। यहां 10 से 12 सीटें जीतने के लिए बीजेपी को मोदी का ही सहारा है।

लिंगायत कार्ड

पार्टी का मानना है कि कांग्रेस अंतिम अस्त्र के तौर पर बीजेपी की केंद्र सरकार पर लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने वाले राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी न देने का आरोप लगाएगी। लेकिन बीजेपी के भरोसा है कि इससे उन्हें अधिक नुकसान नहीं होगा।
 



कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।


फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।






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ओबीसी बनाम ओबीसी







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After Narendra Modi And Amit Shah Top Choice Of Karnataka Is Yogi Adityanath - मोदी और शाह के बाद कर्नाटक की टॉप च्वाइस योगी आदित्यनाथ

After Narendra Modi And Amit Shah Top Choice Of Karnataka Is Yogi
Adityanath - मोदी और शाह के बाद कर्नाटक की टॉप च्वाइस योगी आदित्यनाथ
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।

भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।


भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।





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Wednesday, 2 May 2018

BJP And Congress Face Tough Fight Between SC And ST Seats In Karnataka

BJP And Congress Face Tough Fight Between SC And ST Seats In Karnataka
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  • एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और देश भर में दलित आंदोलनों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हैं।
  • 224 में से करीब 100 सीटों पर दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर्स का असर।

बेंगलुरु.देश भर में पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट पर फैसले के बाद काफी विरोध-प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार ने इसे देखते हुए फैसले के विरोध में तुरंत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी। इसकी एक बड़ी वजह कर्नाटक चुनाव भी था, क्योंकि राज्य में दलित और आदिवासी समुदाय के करीब 26% वोटर हैं। वहीं, राज्य से भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि संविधान में बदलाव होना चाहिए। इसका राज्य में काफी विरोध हुआ था।

100 सीटों पर प्रभाव
- कर्नाटक में विधानसभा की 224 में 36 सीटें एससी और 15 एसटी के लिए सुरक्षित हैं। राज्य में करीब 100 सीटों पर अच्छी खासी तादाद में दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर हैं। राज्य की करीब 60 सीटों पर दलित समुदाय और 40 सीटों पर आदिवासी समुदाय के वोटर असर डालते हैं।

- 2014 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा वार सीटों पर बढ़त के लिहाज से भाजपा 36 एससी सीटों में से 18 और कांग्रेस 16 सीटों पर आगे थी। वहीं, एसटी सीटों पर भाजपा 8 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे थी। अब भाजपा ने इन सीटों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। वहीं, कांग्रेस भी जमकर मेहनत कर रही है।

सीएम सिद्दारमैया ने तीन समुदायों को मिलाकर अहिंदा बनाया है

- अहिंदा कन्नड़ शब्दों अल्पसंख्यातरू (अल्पसंख्यक), हिंदुलिदावरु मट्टू (पिछड़ी जातियां) और दलितरु (दलितों) का शॉर्ट फॉर्म है। इस समुदाय के कर्नाटक में करीब 60% वोटर हैं। सीएम सिद्दारमैया ने इनके लिए कई योजनाएं चला रखी हैं। सिद्दारमैया भी ओबीसी हैं। वह खुद को भी अहिंदा बताते रहे हैं।

- कांग्रेस के सीएम सिद्दारमैया दलित और आदिवासियों के लिए कई योजानाएं लॉन्च कर चुके हैं। इनमें गरीबों के लिए मुफ्त में अनाज, छात्रों के लिए दूध और किसानों के लिए बिना ब्याज के कर्ज आदि शामिल हैं। चुनाव से पहले उन्होंने एससी और एसटी समुदाय के लिए 23 करोड़ रु. की कई योजनाएं भी शुरू की थीं।

2014 के आम चुनाव में विधानसभा सीटों पर पार्टियों की बढ़त
समुदायकांग्रेसभाजपाजेडीएसकुल
एससी16180236
एसटी07080015
जनरल5410613173
कुल7713215224

कर्नाटक में परिवारवाद: भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के 52 सगे मैदान में

- कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस ने परिवारवाद की पूरी फौज चुनावी मैदान में उतार रखी है। राज्य में 12 मई को होने वाले वोटिंग के लिए 2,655 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 2436 पुरुष और 219 महिला हैं।

- राजनीतिक दलों के परिवारवाद को देखें तो कुल 52 सगे-संबंधी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक में जेडीएस को तो पिता-पुत्र की पार्टी के नाम से जाना ही जाता है। पर इस मामले में कांग्रेस और भाजपा भी ज्यादा पीछे नहीं है। दोनों पार्टियों ने चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर अपने नेताओं के सगे-संबंधियों को खूब टिकट दिए हैं।

- जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे-बहू चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवारों के बेटे भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।

# प्रमुख बड़े नेताओं के ये करीबी मैदान में हैं

1) एचडी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री): जेडीएस चीफ
- बेटा एचडी रेवन्ना, एचडी कुमारस्वामी, बहू- भवानी रेवन्ना, अनिथा कुमारस्वामी

2) सिद्दारमैया: मुख्यमंत्री
- खुद 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, बेटे- यतींद्र भी मैदान में हैं।

3) बीएस येद्दियुरप्पा: भाजपा के सीएम उम्मीदवार
- इनके अलावा बड़ा बेटा राघवेंद्र चुनाव मैदान में हैं।

4) गृह मंत्री रामलिंगा रेड्‌डी
- बेटी सोमैया रेड्‌डी भी लड़ रहीं।

5) कानून मंत्री टीवी जयेंद्र
- बेटा संतोष जयचंद।

6) भाजपा नेता जनार्दन रेड्‌डी
- इनके दोनों भाई- सोमेश्वर, करुणाकरण रेड्‌डी मैदान में।

7) मल्लिकार्जुन खड़गे
- बेटा प्रियांक खड़गे कलबुर्गी से।

8) वीरप्पा मोइली
- बेटा हर्ष मोईली भी लड़ रहे हैं।

9) मार्ग्रेट अल्वा
- इनकी बेटी निवेदिता अल्वा कांग्रेस के टिकट पर हैं।



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Narendra Modi Rallies In Karnataka Assembly Election

Narendra Modi Rallies In Karnataka Assembly Election
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बेंगलुरू.कर्नाटक में मोदी गुरुवार को कलबुर्गी, बेल्लारी और बेंगलुरु में 3 रैलियां करेंगे। इस दौरान मोदी 47 सीटों को कवर करेंगे। उधर, स्थानीय नेताओं की मांग पर प्रधानमंत्री की रैलियों की संख्या बढ़ा दी है। पहले शेडयूल में उन्हें 15 जगह जनसभाओं को संबोधित करना था। अब 6 और रैलियां करेंगे। यानी मोदी अब कुल 21 रैलियां करेंगे। हालांकि, अभी भाजपा ने यह नहीं बताया है कि ये रैलियां कहां और कब होंगी। इन नेताओं का कहना है कि मोदी की 1 मई को हुई 3 रैलियों से माहौल बदला है। बता दें कि राज्य में 224 सीटों पर 12 मई को वोटिंग होगी और 16 मई को नतीजे आएंगे।

21 सभाओं में 215 सीटों को कवर करेंगे
- कर्नाटक में मोदी की पहले 15 रैलियां प्रस्तावित थीं। अब 6 और रैलियों में बदलाव किया गया है। मोदी के चुनाव प्रचार का अगला चरण 5 मई को शुरू होगा। इसमें मोदी टुमकुर, शिवमोगा (शिमोगा) और गड़ाग में सभाएं करेंगे। यहां वे 49 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी 7 मई को रायचूर, चित्रदुर्ग, कोलार और 8 मई को विजयवाड़ा और मैंगलुरु में रैली करेंगे। इन दो दिनों में वे 65 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत 1 मई को थी। मोदी ने पहली सभा में चामाराजनगर, मैसूर और मांड्या की 22 सीटों को कवर किया था। इस तरह मोदी 21 सभाओं के जरिए 215 सीटों को कवर करेंगे।

मोदी ने साधा था राहुल गांधी के 15 मिनट की चुनौती पर निशाना
- नरेंद्र मोदी ने पहले चरण के चुनावी अभियान में कांग्रेस सीएम सिद्धारमैया और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था- राहुल सिद्धारमैया सरकार की उपलब्धियों पर किभी भी भाषा में बिना पढ़े 15 मिनट बोलकर दिखाएं।

- मोदी के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। जवाब में सिद्धारमैया ने कहा था- "येदियुरप्पा की पूर्व सरकार की उपलब्धियों पर प्रधानमंत्री कागज से पढ़कर ही 15 मिनट बोल दें।"

मोदी ने किसानों से भी किया संवाद
- मोदी ने बुधवार को पार्टी की किसान इकाई के कार्यकर्ताओं से भी ऐप के जरिए बात की। कर्नाटक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शिकायतों पर मोदी ने कर्नाटक सरकार को उदासीन बताया।



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No Prise Rise In Petrol And Diesel Due To Karnataka Election, No Official Statement From Ministry - तो क्या 12 मई के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम!

No Prise Rise In Petrol And Diesel Due To Karnataka Election, No
Official Statement From Ministry - तो क्या 12 मई के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के
दाम!
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No Prise Rise In Petrol And Diesel Due To Karnataka Election, No Official Statement From Ministry - तो क्या 12 मई के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम!- Amar Ujala Hindi News















































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Karnataka Election First Time In The Country Chunavana App To Be Use

Karnataka Election First Time In The Country Chunavana App To Be Use
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बेंगलुरु.कर्नाटक विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग इलेक्शन से जुड़ी अहम जानकारी मुहैया कराने के लिए खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करेगा। देश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग होगा। बुधवार को कर्नाटक रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने चुनाव (इलेक्शन) ऐप लॉन्च किया। आयोग के मुताबिक, इससे राज्य के 5 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को पोलिंग बूथ, उम्मीदवारों और मतदान से जुड़ी अहम जानकारी मिलेगी। बता दें कि कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 15 तारीख को आएंगे।

ऐप पर मिलेगा सभी मतदान केंद्रों का नक्शा

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने चुनाव ऐप लॉन्च करते हुए कहा कि यह मतदाताओं के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल साबित होगा।

- चुनाव ऐप में कर्नाटक की सभी विधानसभा सीटों के अंतर्गत आने वाले 56 हजार 696 मतदान केंद्रों का नक्शा लोड किया गया है। इसके जरिए मतदाता अपना वोटर आईडी नंबर, मतदान केंद्र तक जाने का रास्ता और वहां लगी कतारों की जानकारी हासिल कर पाएंगे।

उम्मीदवारों की परफार्मेंस भी पता चलेगी

- इस ऐप के जरिए मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार से जुड़ी अहम जानकारी जान सकते हैं। मसलन पिछले चुनावों में उम्मीदवारों की परफार्मेंस क्या थी और उन्हें कितने वोट मिले थे।

ऐप के साथ वेब पर भी मिलेगी जानकारी

- चुनाव ऐप के जैसे ही वेबसाइट kgis.ksrsac.in/election पर भी जानकारियां उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए कर्नाटक एप्लीकेशन सेंटर ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मतदाता चाहें तो साइट पर जाकर भी किसी विधानसभा क्षेत्र और उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

मतगणना के वक्त भी अपडेट मिलेगा

- चुनाव आयोग ने वेब और ऐप को ऐसे डिजाइन कराया है कि मतगणना के वक्त भी लोगों को उम्मीदवारों को मिले वोटों के अपडेट मिलते रहेंगे। साथ ही ऐप में दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर बुक करने का ऑप्शन दिया गया है, ताकि वे मतदान केंद्र तक आसानी से पहुंच सकें।



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