Friday, 4 May 2018

Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार

Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी
भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार
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ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 11:47 PM IST



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वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 

जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।



वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 


जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।





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Thursday, 3 May 2018

केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से SC/ST एक्ट संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का किया आग्रह

केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से SC/ST एक्ट संबंधी अपने फैसले पर रोक लगाने का किया आग्रह
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट को लेकर दिए निर्णय पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार गुरुवार को कोर्ट से अनुरोध किया. इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इन समुदायों के अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रति अत्याचार करने के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने का सौ फीसदी हिमायती है. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इस मामले में न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया. 


उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ऐसे नियम या दिशानिर्देश नहीं बना सकती जो विधायिका द्वारा पारित कानून के विपरीत हों. वेणुगोपाल ने अनुसूचित जाति - जनजाति कानून से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को वृहद पीठ को सौंपने का अनुरोध करते हुये कहा कि इस व्यवस्था की वजह से जानमाल का नुकसान हुआ है. 


यह भी पढ़ेंः SC/ST कानून पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रहा है केंद्र


पीठ ने अपने 20 मार्च के फैसले को न्यायोचित ठहराते हुये कहा कि अनुसूचित जाति - जनजाति कानून पर अपनी व्यवस्था के बारे में निर्णय करते समय शीर्ष अदालत ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं और फैसलों पर विचार किया था. 


पीठ ने कहा कि वह सौ फीसदी इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने और उनपर अत्याचार के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने के पक्ष में है. केन्द्र ने अनुसूचित जाति - जनजाति ( अत्याचारों की रोकथाम ) कानून , 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दो अप्रैल को न्यायालय में याचिका दायर की थी. 


शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने का निश्चय किया था परंतु उसने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मामले में और किसी याचिका पर विचार नहीं करेगी. यही नहीं , न्यायालय ने केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर फैसला होने तक 20 मार्च के अपने निर्णय को स्थगित रखने से इंकार कर दिया था. इस फैसले के बाद अनुसूचित जाति और जनजातियों के अनेक संगठनों ने देश में दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था जिसमें आठ व्यक्तियों की जान चली गयी थी. 


(इनपुट भाषा से)




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एससी-एसटी एक्ट: फैसले पर रोक से कोर्ट का इनकार, कहा- हम अधिकारों की रक्षा के पक्ष में

एससी-एसटी एक्ट: फैसले पर रोक से कोर्ट का इनकार, कहा- हम अधिकारों की रक्षा के
पक्ष में
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें एससी-एसटी एक्ट पर दिए फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम 100 फीसदी पिछड़े समुदायों के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में हैं। अदालत ने केंद्र के उस दावे से भी पूरी तरह अहसमति जताई, जिसमें कहा गया था कि फैसले की वजह से राज्यों में हुई हिंसा में लोगों की जान गई। मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी। बता दें कि इससे पहले हुई सुनवाई में भी केंद्र ने कहा था कि फैसले से कानून के प्रावधान कमजोर हुए हैं।


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Wednesday, 2 May 2018

आधार डाटा लीक पर EPFO का बड़ा बयान, CSC की सेवाएं रोकीं और सर्वर किया बंद

आधार डाटा लीक पर EPFO का बड़ा बयान, CSC की सेवाएं रोकीं और सर्वर किया बंद
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नई दिल्ली: कर्मचारियों के आधार डाटा लीक की आशंका पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने आननफानन में अपने आनलाइन सामान्य सेवा केंद्र (CSC) की सेवाएं रोक दी हैं. उसका कहना है कि सीएससी की ‘संवेदनशीलता की जांच’ लंबित रहने तक इन सेवाओं को रोका गया है. हालांकि, ईपीएफओ ने सरकार की वेबसाइट से अंशधारकों का डाटा लीक की किसी आशंका को खारिज किया है. ईपीएफओ का यह बयान इन खबरों के बाद आया कि हैकर्स ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के तहत आने वाले साझा सेवा केंद्र द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइट aadhaar.epfoservices.com से अंशधारकों का डाटा चोरी किया है. ये रपटें ईपीएफओ केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वीपी जॉय द्वारा सीएससी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश त्यागी को लिखे पत्र पर आधारित हैं.


सीएससी का डाटा केंद्र से लेना-देना नहीं
ईपीएफओ ने बयान जारी कर कहा, 'डाटा या सॉफ्टवेयर की संवेदनशीलता को लेकर चेतावनी एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है. इसी आधार पर सीएससी के जरिये प्रदान की जाने वाली सेवाओं को 22 मार्च, 2018 से रोक दिया गया है.' ईपीएफओ ने कहा कि ये रिपोर्ट सीएससी के जरिये सेवाओं के बारे में है और इनका ईपीएफओ सॉफ्टवेयर या डाटा केंद्र से लेना देना नहीं है. ईपीएफओ ने कहा कि डाटा लीक अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है. डाटा सुरक्षा और संरक्षण के लिए ईपीएफओ ने अग्रिम कार्रवाई करते हुए सर्वर को बंद कर दिया है. जांच पूरी होने तक सीएससी के जरिये सेवाएं प्रदान नहीं की जाएंगी. ईपीएफओ ने कहा कि किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है. डाटा लीक की किसी भी संभावना को रोकने के लिए हरसंभव उपाय किए गए हैं. भविष्य में इस बारे में सतर्कता बरती जाएगी.


6.25 हजार करोड़ की पहले लगी थी चोट
कुछ दिन पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा था कि ईपीएफओ में 6.25 हजार करोड़ का डिफॉल्ट हुआ है. 1539 सरकारी कंपनियों ने ईपीएफ के 1360 करोड़ रुपये नहीं जमा कराए जबकि प्राइवेट कंपनियों ने 4651 करोड़ रुपये नहीं जमा कराए. इन घपलेबाजों में कई बड़े नाम शामिल थे. कंपनियों को ट्रैक करने वाले ईपीएफओ के एक विभाग ने पाया कि खुद के प्रॉविडेंट फंड ट्रस्ट चलाने वाली इन 433 कंपनियों ने अपने कर्मचारी के फरवरी 2018 के पीएफ रिटर्न फाइल नहीं किए हैं.




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