Friday, 4 May 2018

Kathua case: Probe be handed over to CBI, accused tells SC | कठुआ केस : दो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

Kathua case: Probe be handed over to CBI, accused tells SC | कठुआ केस :
दो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
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नई दिल्ली: कठुआ सामूहिक बलात्कार मामले के दो मुख्य आरोपियों ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए , ताकि न्याय हो सके. गौरतलब है कि जनवरी में आठ साल की एक बच्ची का शव कठुआ के रासना जंगल से मिला था. उससे सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. आरोपियों ने मुकदमे को चंडीगढ़ स्थानांतरित किए जाने की याचिका का भी विरोध किया है. 


सांझी राम और विशाल जंगोत्रा ने दावा किया कि पुलिस एक निष्पक्ष और प्रभावी जांच करने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच करने वाली विशेष जांच टीम ( एसआईटी ) में दागी अधिकारी शामिल थे. 


शीर्ष न्यायालय में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में आरोपियों ने मृतका के पिता की उस याचिका का विरोध किया है जिसके तहत उन्होंने मुकदमे की सुनवाई कठुआ से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की है.  उन्होंने दलील दी है कि मामले में 221 गवाह हैं और चंडीगढ़ जाकर अदालती कार्यवाही में शामिल होना उनके लिए मुश्किल होगा. 


गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने 27 अप्रैल को मुकदमे की सुनवाई पर सात मई तक के लिए रोक लगा दी थी. आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है. 




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Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार

Refusal Of Stay On Order Of Cbi Probe Of Uppsc Recruitment - यूपीपीएससी
भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक से इनकार
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ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 11:47 PM IST



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वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 

जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।



वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। 


जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ यूपीपीएसी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

पीठ ने नौ और 18 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए आदेशों को भी फिलहाल बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि सीबीआई यूपीपीएससी के मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को तलब कर पूछताछ नहीं कर सकेगी। साथ ही इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 

आयोग को सीबीआई द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुहैया कराने होंगे। साथ ही आयोग को वे दस्तावेज भी मुहैया कराने होंगे, जिनकी जांच एजेंसी को दरकार होगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। हालांकि सीबीआई आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व सदस्यों से पूछताछ कर सकेगी।





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