Saturday, 5 May 2018

Exchange Of Gunfire Between Police And A Homicide Suspect In Terre Haute - अमेरिका में बीच सड़क पर एनकाउंटर, मासूमों की जान का प्यासा 'खल्लास'

Exchange Of Gunfire Between Police And A Homicide Suspect In Terre
Haute - अमेरिका में बीच सड़क पर एनकाउंटर, मासूमों की जान का प्यासा 'खल्लास'
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ये कोई फिल्मी शूटिंग नहीं है बल्कि असल मुठभेड़ की दिल दहला देने वाली तस्वीर है। अमेरिका के टेरे हॉट शहर में पुलिस उस हालत को काबू करने की कोशिश में है जब एक खूंखार सैकड़ों की जान पर खतरा बन गया। 

एक नर हत्यारे के मंसूबों पर पानी फेरने की खातिर पुलिस अधिकारियों की एक बटालियन मुठभेड़ में लगी हुई है। आमने-सामने की इस गोलीबारी में एक पुलिस अधिकारी को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। 

कई घंटों तक चली ये मुठभेड़ तभी खत्म हुई जब नर हत्यारा मारा गया। इस मुठभेड़ में पुलिस बीच सड़क पर डटी रही तो खतरनाक इरादे लिए नर हत्यारा एक अपार्टमेंट से गोलीबारी कर रहा था। 

पुलिस को इस बात की भी चिंता थी कि इस मुठभेड़ में आम नागरिकों को कोई नुकसान ना हो जबकि दरिंदे को किसी की परवाह नहीं थी। उसका उद्देश्य ही लोगों को नुकसान पहुंचाने का था और वो निर्दोष लोगों की जान लेने पर आमादा था। 



ये कोई फिल्मी शूटिंग नहीं है बल्कि असल मुठभेड़ की दिल दहला देने वाली तस्वीर है। अमेरिका के टेरे हॉट शहर में पुलिस उस हालत को काबू करने की कोशिश में है जब एक खूंखार सैकड़ों की जान पर खतरा बन गया। 


एक नर हत्यारे के मंसूबों पर पानी फेरने की खातिर पुलिस अधिकारियों की एक बटालियन मुठभेड़ में लगी हुई है। आमने-सामने की इस गोलीबारी में एक पुलिस अधिकारी को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। 

कई घंटों तक चली ये मुठभेड़ तभी खत्म हुई जब नर हत्यारा मारा गया। इस मुठभेड़ में पुलिस बीच सड़क पर डटी रही तो खतरनाक इरादे लिए नर हत्यारा एक अपार्टमेंट से गोलीबारी कर रहा था। 

पुलिस को इस बात की भी चिंता थी कि इस मुठभेड़ में आम नागरिकों को कोई नुकसान ना हो जबकि दरिंदे को किसी की परवाह नहीं थी। उसका उद्देश्य ही लोगों को नुकसान पहुंचाने का था और वो निर्दोष लोगों की जान लेने पर आमादा था। 





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Thursday, 3 May 2018

India+kashmir In Unesco Report Of Nation Chapters List - यूनेस्को की रिपोर्ट में 'इंडिया+कश्मीर' लिखे जाने पर विवाद

India+kashmir In Unesco Report Of Nation Chapters List - यूनेस्को की
रिपोर्ट में 'इंडिया+कश्मीर' लिखे जाने पर विवाद
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प्रेस की स्वतंत्रता पर बृहस्पतिवार को जारी की गई यूनेस्को की एक रिपोर्ट में देशों की लिस्ट में इंडिया+कश्मीर लिखे जाने पर विवाद हो गया। इसे लेकर रिपोर्ट की रिलीज देखने आए लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ये रिपोर्ट कश्मीर के अस्तित्व को स्वीकारती है। 

हालांकि यूनेस्को की ये रिपोर्ट तैयार करने वाली विंग द यूनेस्को-इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएफजे) के दक्षिण एशिया समन्वयक उज्जवल आचार्य ने इसे नकार दिया। 

उन्होंने कहा कि कश्मीर को दक्षिण एशिया के सबसे विस्फोटक क्षेत्रों में से एक होने के कारण स्पेशल फोकस के तौर पर अलग से दर्शाया गया है। 

उन्होंने कहा कि ये नई बात नहीं है, पिछले साल भी छत्तीसगढ़, काबुल, श्रीलंका के कुछ हिस्सों, नेपाल और पाकिस्तान को भी इस तरह से दिखाया जा चुका है। 

बृहस्पतिवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यूनेस्को की रिपोर्ट ‘कठोर नीति और साहस- दक्षिण एशिया प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट 2017-18’ के नाम से यहां पर यूनेस्को कार्यालय में रिलीज की गई।



प्रेस की स्वतंत्रता पर बृहस्पतिवार को जारी की गई यूनेस्को की एक रिपोर्ट में देशों की लिस्ट में इंडिया+कश्मीर लिखे जाने पर विवाद हो गया। इसे लेकर रिपोर्ट की रिलीज देखने आए लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ये रिपोर्ट कश्मीर के अस्तित्व को स्वीकारती है। 


हालांकि यूनेस्को की ये रिपोर्ट तैयार करने वाली विंग द यूनेस्को-इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएफजे) के दक्षिण एशिया समन्वयक उज्जवल आचार्य ने इसे नकार दिया। 

उन्होंने कहा कि कश्मीर को दक्षिण एशिया के सबसे विस्फोटक क्षेत्रों में से एक होने के कारण स्पेशल फोकस के तौर पर अलग से दर्शाया गया है। 

उन्होंने कहा कि ये नई बात नहीं है, पिछले साल भी छत्तीसगढ़, काबुल, श्रीलंका के कुछ हिस्सों, नेपाल और पाकिस्तान को भी इस तरह से दिखाया जा चुका है। 

बृहस्पतिवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यूनेस्को की रिपोर्ट ‘कठोर नीति और साहस- दक्षिण एशिया प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट 2017-18’ के नाम से यहां पर यूनेस्को कार्यालय में रिलीज की गई।





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World Press Freedom Day: Know How Many Journalist Lost Their Lives In India - World Press Freedom Day: विश्व रैंकिंग में फिसला भारत, 7 सालों में इतने पत्रकारों ने गंवाई जान

World Press Freedom Day: Know How Many Journalist Lost Their Lives In
India - World Press Freedom Day: विश्व रैंकिंग में फिसला भारत, 7 सालों में इतने
पत्रकारों ने गंवाई जान
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वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे पूरी दुनिया में आज मनाया जा रहा है। दुनियाभर की नामचीन हस्तियां इस मौके पर पत्रकारों को बधाई दे रही हैं। वैश्विक संगठन यूनेस्को ने ट्वीट कर लिखा- पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। बिना सुरक्षित पत्रकारिता के सुरक्षित सूचना हो नहीं सकती। बिना सूचना के कोई आजादी नहीं होती। आज और रोजाना प्रेस की आजादी के लिए खड़े हों। 


भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। मगर हमारे देश में पत्रकारों की स्थिति पिछले कुछ सालों के दौरान बदतर हुई है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 180 मजबूत देशों की सूची में भारत तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आ गया है। इससे पहले भारत 133वें स्थान पर था। इस सूची में पहले नंबर पर जहां नॉर्वे है, वहीं दक्षिण कोरिया सबसे नीचे पायदान पर मौजूद है। पूरी दुनिया में इस समय 193 पत्रकार जेल में हैं। 

भारत के पिछले सात सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो परिस्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साल 2012 में 74, 2013 में 73, 2014 में 61, 2015 में 73, 2016 में 48, 2017 में 46 और साल 2018 में अब तक 14 पत्रकारों ने काम के दौरान अपनी जान गंवाई है। यानी सात सालों में 389 पत्रकारों की जान केवल भारत में गई है।

दुनिया पत्रकारों के लिए नर्क वाली जगह बन चुकी है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 21 देशों को काले रंग में दिखाया गया है। जिसका मतलब है कि इन देशों में प्रेस की आजादी बहुत खराब है। वही 51 देशों को खराब स्थिति वाले वर्ग में रखा गया है। 

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पत्रकारों को प्रेस फ्रीडम की बधाई देते हुए लिखा है- आज भारतीय पत्रकारों के लिए कठिन समय है। ईमानदार और संतुलित आवाजों को झूठ से दबा दिया जाता है। यह बहुत जरूरी है कि हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत बनाया जाए और इसे और निडर बनाने के लिए योगदान दिया जाए।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पत्रकारों को सूचना का महत्वपूर्ण जरिया बताया है। उन्होंने लिखा- मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़ है। प्रेस हमेशा से दुनिया भर में सूचना, आलोचना और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इसलिए प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक है। 
 





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Wednesday, 2 May 2018

Controversy Create After National Film Awards Are Not Given By The President - राष्ट्रपति के अलावा स्मृति के हाथों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर छिड़ा विवाद

Controversy Create After National Film Awards Are Not Given By The
President - राष्ट्रपति के अलावा स्मृति के हाथों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर
छिड़ा विवाद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 May 2018 10:20 AM IST



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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्वारा कुछ अहम पुरस्कार ही दिए जाने की घोषणा से पुरस्कृत होने वाले कई लोग नाराज हो गए हैं। कई ने पुरस्कार न लेने की चेतावनी दी है।

राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी कार्यक्रम को सिर्फ एक घंटे का समय देते हैं। इस दौरान यदि वे सभी पुरस्कृत लोगों को खुद सम्मानित न कर पाए तो शेष पुरस्कार केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। 

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार अशोक मलिक का कहना है कि पद ग्रहण करने के बाद से वह प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। लेकिन जाने से पहले सभी पुरस्कृत लोगों के साथ एक ग्रुप फोटो जरूर खिंचवाएंगे। अभी तक राष्ट्रपति सभी राष्ट्रीय पुरस्कार स्वयं देते थे। इस बार भी आमंत्रण पत्र पर यही लिखा है कि इसी बात से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कुछ लोगों में आक्रोश है। 



राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्वारा कुछ अहम पुरस्कार ही दिए जाने की घोषणा से पुरस्कृत होने वाले कई लोग नाराज हो गए हैं। कई ने पुरस्कार न लेने की चेतावनी दी है।


राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी कार्यक्रम को सिर्फ एक घंटे का समय देते हैं। इस दौरान यदि वे सभी पुरस्कृत लोगों को खुद सम्मानित न कर पाए तो शेष पुरस्कार केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी देंगी। 

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार अशोक मलिक का कहना है कि पद ग्रहण करने के बाद से वह प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। लेकिन जाने से पहले सभी पुरस्कृत लोगों के साथ एक ग्रुप फोटो जरूर खिंचवाएंगे। अभी तक राष्ट्रपति सभी राष्ट्रीय पुरस्कार स्वयं देते थे। इस बार भी आमंत्रण पत्र पर यही लिखा है कि इसी बात से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कुछ लोगों में आक्रोश है। 





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Libya Violence: Many Killed In Tripoli Election Hq Attack - लीबिया में आत्मघाती हमला, चुनाव आयोग के मुख्यालय में 11 लोगों के मारे जाने की खबर

Libya Violence: Many Killed In Tripoli Election Hq Attack - लीबिया में
आत्मघाती हमला, चुनाव आयोग के मुख्यालय में 11 लोगों के मारे जाने की खबर
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लीबिया में हुए एक आत्मघाती हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है। आत्मघाती हमलावर ने राजधानी त्रिपोली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में खुद को उड़ा दिया। सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने मृतकों की संख्या की पुष्टि कर दी है, जबकि हमले में दो घायल भी हैं। 

आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय चुनाव आयोग के मुख्यालय से तेज धमाके की आवाज सुनी, जिसके बाद वहां धुएं का काला गुबार बन गया। 

धमाके के बाद गोलियों की आवाज भी सुनाई दी गईं। हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट (आईएस) है। बता दें कि 30 मार्च को भी लीबिया के पूर्वी हिस्से में एक आत्मघाती कार हमले में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी आईएस ने ली थी। 



लीबिया में हुए एक आत्मघाती हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है। आत्मघाती हमलावर ने राजधानी त्रिपोली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में खुद को उड़ा दिया। सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने मृतकों की संख्या की पुष्टि कर दी है, जबकि हमले में दो घायल भी हैं। 


आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय चुनाव आयोग के मुख्यालय से तेज धमाके की आवाज सुनी, जिसके बाद वहां धुएं का काला गुबार बन गया। 

धमाके के बाद गोलियों की आवाज भी सुनाई दी गईं। हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट (आईएस) है। बता दें कि 30 मार्च को भी लीबिया के पूर्वी हिस्से में एक आत्मघाती कार हमले में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी आईएस ने ली थी। 





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Tuesday, 1 May 2018

कल्पना चावला को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया अमेरिकी नायिका, 2003 के कोलंबिया हादसे में गई थी जान

कल्पना चावला को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया अमेरिकी नायिका, 2003 के कोलंबिया हादसे में
गई थी जान
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ट्रंप ने कहा, ‘‘कल्पना चावला का साहस और जुनून अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देखने वाली लाखों अमेरिकी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बन गया.’’





कल्पना चावला को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया अमेरिकी नायिका, 2003 के कोलंबिया हादसे में गई थी जान

2003 में अंतरिक्ष यान कोलंबिया से संबंधित हादसे में कल्पना चावला सहित 7 ने जान गंवाई थी. (फाइल फोटो)







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