Friday, 4 May 2018

आईपीएल11: सबसे महंगे बिके स्टोक्स-जयदेव फ्लॉप; 20 लाख में खरीदे गए मयंक विकेट लेने में दूसरे नंबर पर

आईपीएल11: सबसे महंगे बिके स्टोक्स-जयदेव फ्लॉप; 20 लाख में खरीदे गए मयंक विकेट लेने में
दूसरे नंबर पर
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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण में 34 मैच हो चुके हैं। 5 टीमें 9-9 और 3 टीमें 8-8 मैच खेल चुकी हैं। लेकिन, अब तक के मैचों में एक बात सामने आ रही है कि इस टूर्नामेंट में महंगे बिके खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इस लिस्ट में बेन स्टोक्स, जयदेव उनादकट, मनीष पांडेट लोकेश राहुल, ग्लेन मैक्सवेल और कुनाल पंडया का नाम शामिल है। स्टोक्स ने 8 मैच में सिर्फ 1 विकेट लिया है। इन सभी को 9 करोड़ से 12.5 करोड़ में खरीदा गया। उधर, सिर्फ 20 लाख के खिलाड़ी मुंबई के मयंक मार्कंडे बेहतरीन खेल रहे हैं। ट्रेंट बोल्ट के बाद टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले मयंक दूसरे गेंदबाज हैं।


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Wednesday, 2 May 2018

Amit Shah Will Go To Madhya Pradesh To Check Election Preparations - चुनावी तैयारियों का जायजा लेने मध्यप्रदेश जाएंगे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

Amit Shah Will Go To Madhya Pradesh To Check Election Preparations -
चुनावी तैयारियों का जायजा लेने मध्यप्रदेश जाएंगे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Wed, 02 May 2018 04:42 PM IST



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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चार मई को भोपाल पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि शाह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे साथ ही प्रचार की रणनीति भी तय करेंगे। शाह चार दिनों तक राज्य में रहेंगे और पार्टी के सभी 400 मंडलों की बैठक लेंगे। 

गौरतलब है कि हाल ही में राकेश सिंह को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राकेश सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद शाह का यह पहला प्रदेश दौरा है। मध्यप्रदेश भाजपा की कोर टीम चार दिनों तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनावी रणनीति तय करेगी और उसकेa चरणवार क्रियान्वन की रूपरेखा भी तय की जाएगी।



भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चार मई को भोपाल पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि शाह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे साथ ही प्रचार की रणनीति भी तय करेंगे। शाह चार दिनों तक राज्य में रहेंगे और पार्टी के सभी 400 मंडलों की बैठक लेंगे। 


गौरतलब है कि हाल ही में राकेश सिंह को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राकेश सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद शाह का यह पहला प्रदेश दौरा है। मध्यप्रदेश भाजपा की कोर टीम चार दिनों तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनावी रणनीति तय करेगी और उसकेa चरणवार क्रियान्वन की रूपरेखा भी तय की जाएगी।




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Tuesday, 1 May 2018

Oath A Must For Trust Vote, Matter Reached Supreme Court - पंचायत चुनाव में शपथ न लेने का मुद्दा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

Oath A Must For Trust Vote, Matter Reached Supreme Court - पंचायत चुनाव में
शपथ न लेने का मुद्दा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 01 May 2018 12:13 PM IST



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सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ में निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा ली जाने वाली शपथ का मुद्दा पहुंचा है लेकिन इस मुद्दे पर जजों के बीच मतभेद है कि एक चुना हुआ सदस्य बिना शपथ लिए अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकता है या नहीं। 

दरअसल मामला उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ है। यहां सरपंच के चुनाव के एक साल बाद बाकी सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि जो सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाये थे उनमें से 13 लोगों ने पंचायत सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली थी लेकिन उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिये। इसके बाद अदालत में याचिका दायर कर पूछा गया कि जिन लोगों ने पंचायत सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली क्या वो अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और क्या वो वैद्य सदस्य हैं। 

जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता के बीच इस मामले में अलग राय है। जस्टिस लोकुर ने इस मामले में 34 साल पुराने 1984 के मामले का हवाला दिया जिसमें एक MLA जिसने शपथ नहीं ली थी और उसने एक शख्स का नाम राज्यसभा के लिए प्रस्तावित किया था। इस मामले में एससी ने कहा था कि अगर चुनाव आयोग एक बार किसी शख्स के निर्वाचित होने का नोटीफिकेशन जारी कर देती है तो वह राज्यसभा में जाने के लिए किसी शख्स का प्रस्तावक बन सकता है। इसी तरह गांव के सरपंच के खिलाफ लाये गए अविश्वास प्रस्ताव में जिन लोगों ने बिना शपथ लिए हस्ताक्षर किये हैं, उनको यह करने का पूरा अधिकार है। 

 वहीं जस्टिस गुप्ता का कहना है कि जस्टिस लोकुर द्वारा दिया गया तर्क सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सदस्य शपथ नहीं लेता तो फिर क्या महत्व है इसका? शपथ न लेने से वह सदस्य बनना बंद नहीं हो जाते लेकिन वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते। इसलिए पंचायत चुनाव मामले में जिन लोगों ने शपथ नहीं ली है वह अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं रखते। 

हालांकि जस्टिस लोकुर और गुप्ता ने कहा कि विधानमंडल को यह अनिवार्य कर देना चाहिए कि पंचायत सदस्य निश्चित समय में शपथ जरूर लें। 



सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ में निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा ली जाने वाली शपथ का मुद्दा पहुंचा है लेकिन इस मुद्दे पर जजों के बीच मतभेद है कि एक चुना हुआ सदस्य बिना शपथ लिए अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकता है या नहीं। 


दरअसल मामला उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ है। यहां सरपंच के चुनाव के एक साल बाद बाकी सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि जो सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाये थे उनमें से 13 लोगों ने पंचायत सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली थी लेकिन उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिये। इसके बाद अदालत में याचिका दायर कर पूछा गया कि जिन लोगों ने पंचायत सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली क्या वो अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और क्या वो वैद्य सदस्य हैं। 

जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता के बीच इस मामले में अलग राय है। जस्टिस लोकुर ने इस मामले में 34 साल पुराने 1984 के मामले का हवाला दिया जिसमें एक MLA जिसने शपथ नहीं ली थी और उसने एक शख्स का नाम राज्यसभा के लिए प्रस्तावित किया था। इस मामले में एससी ने कहा था कि अगर चुनाव आयोग एक बार किसी शख्स के निर्वाचित होने का नोटीफिकेशन जारी कर देती है तो वह राज्यसभा में जाने के लिए किसी शख्स का प्रस्तावक बन सकता है। इसी तरह गांव के सरपंच के खिलाफ लाये गए अविश्वास प्रस्ताव में जिन लोगों ने बिना शपथ लिए हस्ताक्षर किये हैं, उनको यह करने का पूरा अधिकार है। 

 वहीं जस्टिस गुप्ता का कहना है कि जस्टिस लोकुर द्वारा दिया गया तर्क सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सदस्य शपथ नहीं लेता तो फिर क्या महत्व है इसका? शपथ न लेने से वह सदस्य बनना बंद नहीं हो जाते लेकिन वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते। इसलिए पंचायत चुनाव मामले में जिन लोगों ने शपथ नहीं ली है वह अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं रखते। 

हालांकि जस्टिस लोकुर और गुप्ता ने कहा कि विधानमंडल को यह अनिवार्य कर देना चाहिए कि पंचायत सदस्य निश्चित समय में शपथ जरूर लें। 





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